संगम नगरी प्रयागराज में 2025 के महाकुंभ की तैयारियाँ जोरों पर हैं। मेला प्रशासन इसे दिव्य और भव्य बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। इसी क्रम में वैष्णव संप्रदाय के तीनों प्रमुख अखाड़ों—पंच दिगंबर अनी अखाड़ा, पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, और पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा—की धर्मध्वजा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापित की गई।

धर्मध्वजा स्थापना का महत्व:
धर्मध्वजा की स्थापना का मतलब किसी बड़े धार्मिक कार्य के शुभारंभ से पहले पूजा-अर्चना करना है। यह ध्वजा इष्टदेव को समर्पित होती है और धार्मिक आस्था का प्रतीक मानी जाती है। धर्मध्वजा स्थापना के बाद तीनों अखाड़ों की पेशवाई यानी छावनी में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय संत देवेंद्र दास जी महाराज, महंत दुर्गा दास जी महाराज, और अन्य कई साधु-संतों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रशासनिक तैयारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस बार महाकुंभ की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक उत्कृष्ट होगी। संतों ने लोगों से महाकुंभ में आकर सनातन धर्म, आस्था, और आध्यात्मिकता के इस महापर्व का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

महंत महेंद्र राजेंद्र दास जी महाराज (निर्मोही अखाड़ा): “यह महाकुंभ सनातन धर्म की आस्था और प्रकाश का प्रतीक है। हर व्यक्ति को इसमें सम्मिलित होकर पुण्य अर्जित करना चाहिए।”
महंत दुर्गा दास: “यह मेले की शुरुआत नहीं, बल्कि सनातन धर्म को विश्व पटल पर रोशन करने का महापर्व है।”

धर्मध्वजा स्थापना के साथ महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन काशु भारंभ हो गया है।
Anveshi India Bureau



