सलमान खान , रश्मिका मंदाना , सत्यराज , जतिन सरना , काजल अग्रवाल , अंजिनी धवन , शरमन जोशी , प्रतीक बब्बर , संजय कपूर और नवाब शाह आदि
पता नहीं नए दौर में ‘सिकंदर’ को लेकर क्या ही नया इतिहास बन सकता होगा, लेकिन सच यही है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब पृथ्वीराज कपूर और सोहराब मोदी की फिल्म ‘सिकंदर’ रिलीज हुई तो इसे देशभक्ति की भावना जगाने वाली फिल्म मानते हुए ब्रिटिश सरकार ने कई स्थानों पर प्रतिबंधित कर दिया था। फिल्म को गोवा संघर्ष के दौरान साल 1961 में फिर रिलीज किया गया और इसकी बॉक्स ऑफिस सफलता ने इसके निर्माताओं को इसे फारसी में भी डब करके रिलीज करने का हौसला दिया। तब से सिकंदर और पोरस की कहानी के कई आयाम दर्शक देख-सुन चुके हैं। सलमान खान की नई फिल्म ‘सिकंदर’ का इतिहास से तो कोई लेना देना नहीं, लेकिन हां, ये प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के शीर्षक गीत का गीतकार अनजान का लिखा एक अंतरा है, ‘हमने माना ये जमाना दर्द की जागीर है, हर कदम पे आंसुओं की एक नई जंजीर है, साज ए गम पर जो खुशी के गीत गाता जाएगा, वो मुकद्दर का सिकंदर जानेमन कहलाएगा…!’ सलमान खान की फिल्म ‘सिकंदर’ इन्हीं ढाई लाइनों पर बनी फिल्म है। बेसिक आइडिया फिल्म ‘एनिमल’ में रणविजय के हार्ट ट्रांसप्लांट से उठाया गया है, बाकी जो है सब सलमान खान है।

एक जमाना रहा है जब सलमान खान की फिल्म कैसी भी हो, कम से कम उसका पहला शो तो हाउसफुल होता ही था। ‘जय हो’, ‘रेस 3’, ‘दबंग 3’, ‘टाइगर 3’ जैसी तमाम फिल्में हैं जो सिर्फ सलमान खान के होने भर से भीड़ खींच लाती रही हैं। फिल्म इसी चक्कर में इतवार को रिलीज हुई। लेकिन, ईद अब भारत मे सोमवार को है लिहाजा इतवार यानी रिलीज के दिन सिनेमाहाल खाली खाली ही नजर आए। फिल्म शुरू होती है तो लगता है कि कहानी वहीं से शुरू हो रही है, जहां कोई 10 साल पहले सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ खत्म हुई थी। सलमान खान फिर रियासत के राजा के रूप में हैं। संजय राजकोट नाम है उनका, लोग उन्हें राजा साब बुलाते हैं। देश में मौजूद कुल सोने के 25 फीसदी के मालिक हैं। उम्र से कहीं कम एक युवती को बचाने के लिए उससे शादी करते हैं और ये युवती यानी अब उनकी पत्नी उनकी सुरक्षा के लिए दिन रात फिक्रमंद रहती है। ये किस्सा क्या था, न रानी साहिबा बताती हैं, न निर्देशक मुरुगादॉस..!




ए आर मुरुगादॉस की धुप्पल लगी थी आमिर खान की फिल्म ‘गजनी’ में, ये बात भी अब कुछ कुछ ठीक लगने लगी है। उसके बाद उन्होंने ‘हॉलीडे’बनाई, ‘अकीरा’ बनाई और अब ये ‘सिकंदर’। रिंग मास्टर हल्का पड़ जाए तो सर्कस के अदने से कलाकार भी खुद को तीसमार खां समझने लगते हैं। फिल्म ‘सिकंदर’ में इसे होते देख सकते हैं। मुरुगादॉस ने दर्जनों कलाकार जुटाए हैं, लेकिन जमाकर अदाकारी एक से भी नहीं करा सके हैं। हर कलाकार ओवरएक्टिंग की दुकान बना हुआ है। रश्मिका मंदाना के भाव देखकर यूं लगता है कि जैसे कह रही हों, मुझे एक्टिंग करने की जरूरत ही नहीं। मेरा तो बस नाम ही काफी है, फिल्म हिट करा देने के लिए। ‘एनिमल’ और ‘छावा’ ने जो नोट छापे हैं, उसमें ऐसा गुमान किसी को भी हो सकता है। लेकिन, दाढ़ी से सनी देओल की उमर भले छुप सकती हो, दूसरे सितारों को ऐसा गुमान नहीं करना चाहिए। गीत-संगीत फिल्म का माशा अल्ला है। नए गीतकार और संगीतकारों को साजिद नाडियाडवाला जैसे निर्माता ट्राई नहीं करते। इसका फायदा उठाकर म्यूजिक उस्ताद प्रीतम और समीर अनजान ने जो म्यूजिक फिल्म ‘सिकंदर’ का बनाया है, वह अगली ईद तक भी कोई याद रख पाया तो सुभान अल्लाह! ईद आप सबको बहुत बहुत मुबारक हो!
Courtsy amarujala.



