प्रयागराज। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत कल्चर फंक्शन के अन्तर्गत प्रोड्क्शन ग्रान्ट के तत्वाधान में प्रयागराज की नाट्य संस्था “स्पर्श फिजिकल आर्ट एण्ड कल्वर” द्वारा इस वर्ष विगत 45 दिनों की लगातार प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला की प्रस्तुति “पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई” का भव्य दिव्य मंचन के साथ सफलतापूर्वक समापन किया गया। जो कि प्रशिक्षणकर्ता शहर वरिष्ठ रंगकर्मी के०के० श्रीवास्तव, आर०के० सिंह, पंकज पाण्डेय एवं ज्ञान चन्द्रवंशी की देखरेख में 45 दिन तक कार्यशाला चली।
दिनांक 1 मार्च 2025 से 15 अप्रैल 2025 तक समापन हुआ जो कि विषय का चुनाव पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन घटना पर आधारित के साथ मंचन किया गया जिसके शोधकर्ता, प्रशिक्षणकर्ता, परिकल्पना एवं निर्देशन शहर के युवा रंगकर्मी ज्ञान चन्द्रवंशी का था। इसी अवसर पर नगर निगम के मुख्य अतिथि महापौर उमेश चन्द्र गणेश केशरवानी द्वारा दिव्य प्रज्जवलन किया गया इसके बाद उद्घोषक के०के० श्रीवास्तव के द्वारा बूके से सम्मानित किया गया । इसी के तदोपरान्त 6.30 बजे प्रस्तुति प्रारम्भ किया गया जिसका विषय इस प्रकार है।

अहिल्याबाई होल्कर मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी थी जिन्होंने मालवा क्षेत्र पर 1767 से 1795 तक शासन किया वे एक योग्य शासक और प्रबन्धक थी जिन्हें अपने जीवनकाल में बहुत सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें एक संत के रूप में मनाया गया। अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 चौड़ी ग्राम अब हैदराबाद अहिल्यानगर जिला महाराष्ट्र निधन 13 अगस्त 1795 जिला इन्दौर में हुआ। उनके पिता मानकोजी सिन्दे और पति खण्डेराव होल्कर थे उन्होंने उनके शासनकाल में प्रशासन, सामाजिक कार्य, सशक्त व्यक्तित्व, परोपकार, विरासत, सामाजिक सद्भाव, सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, कला एवं संस्कृति आदि का निष्कर्ष यह निकलता है कि मंचन के द्वारा यह दिखाया गया कि अहिल्याबाई होल्कर एक महान शासक और परोपकारी महिला था जिन्होंने अपने राज्य एवं लोगों के लिए बहुत कुछ किया। वे एक प्रेरणास्रोत हैं और आज उन्हें याद किया जाता है। प्रस्तुति समापन के बाद मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को पुनः मंच पर स्वागत किया गया उन्होनें प्रस्तुति एवं कलाकारों को अपने शब्दों से सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसी मैने अपने जीवन में प्रथम नाट्य प्रस्तुति महापुरुषों की जीवन पर आधारित नाट्य मंचन देखकर मैं भाव विभोर हो गया। मैने अहिल्याबाई होल्कर के बारे में किताबों में पढ़ा था लेकिन उनके जीवन को कलाकारों के द्वारा देखकर लगता है कि उस जमाने की बहुत बड़ी वीरांगना थीं जिन्होंने परिवार के कष्टों को सहते हुए समाज में परिवर्तन एवं समाजसेवा को विशेष ध्यान रखा तथा साथ ही साथ धार्मिक कार्यों में भी उल्लेखनीय कार्य था जैसे कि भोले बाबा सम्बन्धित, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, महेश्वर आदि कई मंदिरों का निर्माण कराया जो कि वास्तविक लगता है। मैं ज्ञान चन्द्रवंशी जी को इनके इस कार्य के लिए साधुवाद देता हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में सभी कलाकारों को इस नाट्य प्रस्तुति के लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। इसके बाद उद्घोषक ने कलाकारों का पात्र परिचय कराया गया जो कि इस प्रकार हैः- अहिल्याबाई होल्कर प्रियांशी शुक्ला, मल्हार राव होल्कर- राहुल गौड़, यशवन्त राय होल्कर (दामाद)-हर्ष पाण्डेय, गंगाधर राव-भूपेन्द्र सिंह, नाना फण्डनवीस- अन्नू, मुक्ताबाई-रिया मौर्या, अहिल्याबाई (किशोर) असिता कुशवाहा, मालेराव मेधांश, खण्डेराव रूद्र प्रताप, सूत्रधार एवं कोरस-वेदान्त धुरिया, अजय चौरसिया, प्रिंस, खुशी, सैनिक उत्तम तिवारी, राजेश कुमार, ब्राह्मण-सुमित पाण्डेय आदि ने बाखूबी से 45 दिवसीय कार्यशाला के बाद चरित्र का चित्रण किया। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष ने सभी दर्शकों को धन्यवाद ज्ञापन किया।
Anveshi India Bureau



