पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए थे। इसमें 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद से ही बौखलाए पाकिस्तान ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाले कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आइए जानते हैं विस्तार से…
पाकिस्तान की ओर से भारत संग द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित करने के अधिकार का उपयोग बिना सोच-विचार के उठाया गया है। दरअसल, दोनों के बीच 1972 में हुए शिमला समझौते का निलंबन आतंकियों के पनाहगाह पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। शिमला समझौते का मुख्य बिंदु नियंत्रण रेखा (एलओसी) की पवित्रता को बनाए रखना है। समझौता निलंबित होने का अर्थ है कि कोई भी पक्ष एलओसी को मानने के लिए बाध्य नहीं है और भारत एलओसी को पार कर कोई भी कार्रवाई कर सकता है।
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय से गुरुवार को जारी बयान का अहम बिंदु है कि पाकिस्तान भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित करने के अधिकार का प्रयोग करेगा। इसमें शिमला समझौता भी शामिल है और यह कार्रवाई केवल इसी तक सीमित नहीं है। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान ने बयान में यह नहीं कहा कि वह अधिकार के इस्तेमाल को सुरक्षित रखता है, बल्कि उसने कहा है कि वह अधिकार का प्रयोग करेगा। इसका अर्थ है कि आज, कल या बहुत जल्द वह निश्चित रूप से इन सभी समझौतों को निलंबित करेगा।
दूसरे शब्दों में इसका अर्थ है कि पाकिस्तान ने सभी द्विपक्षीय समझौतों को निलंबित कर दिया है। इसके प्रमुख प्रभाव भी नजर आएंगे। यह बहुत संभव है कि पाकिस्तान ने इन सभी कदमों के परिणामों के बारे में नहीं सोचा है और बौखलाहट में उसने इनकी घोषणा कर दीं। इसका नुकसान पाकिस्तान को ही होगा।






उड़ान अधिकारों से होने वाली आय से वंचित होना पड़ेगा
उड़ान अधिकारों के निलंबन से निजी भारतीय एयरलाइनों के वाणिज्यिक हित प्रभावित होंगे। हालांकि, इससे पाकिस्तान को नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि उसे उड़ान अधिकारों से होने वाली आय से वंचित होना पड़ेगा।
Courtsy amarujala



