शंभूनाथ इंस्टिट्यूट के फाइनेंस विभाग में असिस्टेंट अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत 72 वर्षीय ओम प्रकाश जी का 19 अप्रैल 2025 की शाम बीएचयू के अस्पताल में निधन हो गया। वे फाइनेंस विभाग में 5 वर्ष कार्यरत रहे। निधन के बाद एक सप्ताह बीत गया लेकिन ऐसा एक भी दिन नहीं गया जिस दिन उनके साथियों को उनकी याद न आई हो। उनका व्यक्तित्व इतना अद्भुत था कि पूरा फाइनेंस विभाग उनको बहुत याद करता है। बीते सप्ताह में जब भी किसी काम से आपस में मिलते तो उनकी चर्चा अवश्य होती है।
उपरोक्त बातें अन्वेषी इंडिया के प्रतिनिधि को फाइनेंस विभाग के कर्मचारियों ने बतायीं।

इसे पढ़कर हर किसी के मन में , जो उन्हें नहीं जानता होगा , यह आयेगा कि ऐसा उनके अंदर क्या विशेष था ?
विभाग के साथियों ने बताया कि उनके अंदर एक ओर भरपूर मानवीय गुण थे तो दूसरी ओर उनकी कार्यशैली भी अद्भुत थी।
उन्होंने बताया कि जितने भी गुण किसी व्यक्ति में हो सकते हैं वे सभी उनमें थे। उनके अंदर भरपूर मानवीयता , संवेदनशीलता , कार्य के प्रति पूरी निष्ठा के साथ समर्पण , अनुशासन , कड़ी मेहनत , घोर ईमानदारी इत्यादि सभी गुण थे। ….. यानि उनके हिसाब से बेमिसाल व्यक्तित्व।
वे युवा अवस्था में फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं।
विभाग के प्रमुख ने बताया कि शंभूनाथ इंस्टीट्यूट के सचिव श्री कौशल कुमार तिवारी जी ने उन्हें 5 वर्ष पूर्व जब इस संस्था में नियुक्त किया था तब तिवारी जी ने फाइनेंस विभाग में उनका परिचय कराते हुए कहा था कि ओम प्रकाश जी भारत सरकार के सेंट्रल एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर थे और बेहद ईमानदार थे । ये फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। उस समय तिवारी जी के साथ सामाजिक कार्यकर्ता श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता उर्फ गामा जी भी थे। तिवारी जी ने यह भी कहा था कि हम तीनों ने साथ-साथ फुटबॉल खेला है।
उनकी घोर ईमानदारी इसी से समझी जा सकती है कि वे सेंट्रल एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर के पद से सेवा निवृत हुए थे और सर्विस के दौरान उन्होंने विकास प्राधिकरण से EWS का साधारण फ्लैट लिया था , उसी में सपरिवार रहते थे। परिवार में पत्नी के अतिरिक्त दो बेटी और एक बेटा है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा अभी अविवाहित है। पढ़ लिखकर सर्विस की तलाश में है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्हें सेवा निवृति के बाद भी प्राइवेट संस्था में सर्विस करनी पड़ी थी।
वे निजी आचरण में सिद्धांतवादी थे लेकिन व्यवहार में बहुत सभ्य थे। बोलचाल में बहुत सौम्य थे। उन्हें कभी किसी पर गुस्सा करते नहीं देखा। वे अपने से छोटी उम्र के साथी से भी बड़े सम्मान के साथ व्यवहार करते थे।
जिस समय उन्होंने इस संस्था में कार्य करना शुरू किया उस समय वे 67 साल के थे लेकिन उनमें सीखने की ललक थी । उन्हें कंप्यूटर चलाना थोड़ा बहुत आता था लेकिन आवश्यकता के अनुसार उन्होंने सॉफ्टवेयर पर कार्य करना शुरू कर दिया था और बड़ी कुशलता के साथ अपने कार्य को करते थे। फाइनेंस विभाग के प्रमुख ने बताया कि शुरू में जब उनसे पूछा गया कि आपको कौन सा कार्य दिया जाए तो उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य दे सकते हैं।
बार-बार च्वाइस पूछने पर उन्होंने बताया कि फाइलिंग और पत्र व्यवहार दे दीजिए। उन्हें दोनों कार्य दिए गए। दोनों कार्यों में उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी जिसका आज कोई विकल्प नहीं दिखाई देता है। वे जब किसी के भुगतान का वाउचर बनाते थे तो उसमें उतनी डिटेल दे देते थे कि यदि सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट खो भी जाए तब भी उससे पूरी जानकारी मिल जाएगी। बाद में उन्हें बैंक रिकॉन्सिलियेशन दिया गया तो उसे भी इतने बेहतरीन तरीके से किया जो यादगार बन गया।
इन सभी गुणों के कारण उनका व्यक्तित्व सभी के हृदय को छूता है और प्रेरणाप्रद है।
उनके निधन पर पूरी संस्था ने दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया। उनके दाह संस्कार के समय प्रकाश चंद्र गुप्ता जी के साथ संस्था के अध्यक्ष डॉ धीरेन्द्र कुमार सहित काफी संख्या में उनके परिजन एवं मित्र उपस्थित रहे।
Anveshi India Bureau



