यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आवेदक पुलिसकर्मियों की उनपर दर्ज मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली अर्जी खारिज दी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की पीठ ने अनिमेष कुमार और तीन अन्य की अर्जी पर दिया है।
फर्रूखाबाद जिले की कोतवाली में आवेदकों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि वह 28 जून 2022 को अपने साथियों के साथ कार से जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार आरोपी पुलिसकर्मियों की कार से रगड़ गई।
इस पर आरोपी पुलिसकर्मियों ने उन्हें खुदागंज के पास रोक लिया। इसके बाद उपनिरीक्षक अनिमेष कुमार, कांस्टेबल दुष्यंत, कांस्टेबल कुलदीप यादव, कांस्टेबल सुधीर व अन्य ने उनके साथ मारपीट की। साथ ही रुपये व सोने की चेन छीन ली।
पीड़ित ने बताया कि उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बंधक भी बनाया गया। आरोपियों ने जनवरी 2024 में पारित समन आदेश सहित पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
आरोपी पुलिसकर्मियों के वकील ने दलील दी कि उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। कथित घटना के समय आवेदक पुलिसकर्मी होने के नाते गश्त पर थे। ऐसे में कानून के अनुसार सक्षम अधिकारी से मंजूरी प्राप्त किए बिना उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि लोक सेवक जब अपने आधिकारिक कर्तव्य के दायरे में कार्य कर रहे हैं, तभी उनपर मुकदमा दर्ज करने से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता है।
न्यायालय ने आरोपों की जांच की तो पाया कि घटना के समय आवेदक कथित घटना स्थल पर गश्त नहीं कर रहे थे। हमले और छिनैती के कथित कृत्य का आवेदकों के आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन के साथ कोई तर्कसंगत संबंध नहीं था। गवाहों के बयान व मेडिकल रिपोर्ट से घटना का समर्थन करती है। इसके बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।