जिला अदालत ने 13 साल पहले सात वर्षीय बच्ची संग दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले फूफा को फांसी व 80 हजार रुपये की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला अपर सत्र और पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश अंजू कन्नौजिया की अदालत ने सुनाई है।
जिला अदालत ने 13 साल पहले सात वर्षीय बच्ची संग दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले फूफा को फांसी व 80 हजार रुपये की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला अपर सत्र और पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश अंजू कन्नौजिया की अदालत ने सुनाई है। मामला नवाबगंज थाना क्षेत्र का है।
21 अप्रैल 2012 को पीड़िता के चाचा ने आरोपी के खिलाफ सात वर्षीय भतीजी के साथ दुष्कर्म और हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया कि उसकी बहन और बहनोई उसके साथ ही रहते थे। बच्ची 20 अप्रैल से लापता थी। गांव के लोगों ने उसे बहनोई के साथ देखा था। इसके बाद बच्ची का शव उपहार गांव के पास गंगा के किनारे मिला था।
पुलिस ने मामले में आरोपी फूफा को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर ही बच्ची के कपड़े और हत्या में प्रयुक्त ईंट बरामद की गई। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। करीब 13 साल चले ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से एडीजीसी मनोज पांडेय ने पांच गवाहों को पेश किया।
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, सबूतों और गवाहों के बयान के आधार फूफा को बच्ची संग दुष्कर्म, ईंट से कूंचकर हत्या व सुबूत मिटाने का दोषी करार दिया। कोर्ट ने अबोध बच्ची संग फूफा के इस जघन्य कृत्य को दुर्लभतम मानते हुए फांसी की सजा व 80 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, दोषी फूफा को मिली फांसी की सजा हाईकोर्ट से पुष्टि होने के बाद अमल में लाई जाएगी।



