Saturday, February 21, 2026
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अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर “पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई” का भव्य मंचन 

प्रयागराज। प्रसिद्ध नाट्य संस्था “स्पर्श फिजिकल आर्ट एण्ड कल्चर” रंगमण्डल सत्र 2025-26 की द्वितीय नाट्य प्रस्तुति “पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई” का मंचन भव्यकता के साथ प्रारम्भ किया गया। प्रयागराज की अध्यात्मिक संस्था “हरिहर गंगा आरती समिति के तत्वावधान में (दस दिवसीय) 25वाँ गंगा महोत्सव-2025 के अन्तर्गत चौथे दिन दिनांक 31 मई 2025 को सायं 7.00 बजे स्थान-रामघाट, त्रिवेणी बांध के नीची, संगम प्रयागराज में सफलतापूर्वक कार्यक्रम हुआ जो कि त्रिशताब्दी स्मृति अभियान एवं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयन्ती के अवसर पर उनके जीवन संघर्ष पर आधारित नाट्य प्रस्तुति का मव्यता के साथ मंचन प्रारम्भ हुआ. जिसका निर्देशन शहर के युवा रंगकर्मी ज्ञान चन्द्रवंशी के शोधकर्ता, नाट्य लेखन एवं परिकल्पना द्वारा संयोजन हुआ जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ एवं का कार्यक्रम संयोजक माननीय श्री अवधेश चन्द्र गुप्ता (क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, भा०ज०पा०) काशी प्रान्त एवं हरिहर गंगा आरती के अध्यक्ष एवं संस्थापक सुरेश चन्द्र (संयोजक नमामि गंगे) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन हुआ एवं गंगा आरती के बाद नाट्य प्रस्तुति “पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई” की प्रस्तुति का मंचन प्रारम्भ किया गया जिसका विषय इस प्रकार हैः- अहिल्याबाई होल्कर मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी थी जिन्होंने मालवा क्षेत्र पर 1767 से 1795 तक शासन किया वे एक योग्य शासक और प्रबन्धक थी जिन्हें अपने जीवनकाल में बहुत सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें एक संत के रूप में मनाया गया। अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 चौड़ी ग्राम अब हैदराबाद अहिल्यानगर जिला महाराष्ट्र निधन 13 अगस्त 1795 जिला इन्दौर में हुआ। उनके पिता मानकोजी सिन्दे और पति खण्डेराव होल्कर थे उन्होंने उनके शासनकाल में प्रशासन, सामाजिक कार्य, सशक्त व्यक्त्तित्व, परोपकार विरासत, सामाजिक सद्भाव, सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, कला एवं संस्कृति आदि का निष्कर्ष यह निकलता है कि मंचन के द्वारा यह दिखाया गया कि अहिल्याबाई होल्कर एक महान शासक और परोपकारी महिला था जिन्होंने अपने राज्य एवं लोगों के बहुत कुछ किया। ये एक प्रेरणास्रोत हैं और आज उन्हें याद किया जाता है।प्रस्तुति समापन के बाद मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ एवं विशिष्ट अतिथि को पुनः मंच पर स्वागत किया गया उन्होंने प्रस्तुति एवं कलाकारों को अपने शब्दों से सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसी वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयन्ती के अवसर इस समय पूरे भारत में उनका जयन्ती समारोह चल रहा है इस अवसर पर नाट्य मंचन देखना अपने आपमें गौरान्वित होना।

 

 

मैंने अपने जीवन में प्रथम नाट्य प्रस्तुति महापुरुषों की जीवन पर आधारित नाट्य मंचन देखकर मैं भाव विभोर हो गया। मैने अहिल्याबाई होल्कर के बारे में किताबों में पढ़ा था लेकिन उनके जीवन को कलाकारों के द्वारा देखकर लगता है कि उस जमाने की बहुत बड़ी वीरांगना थी जिन्होंने परिवार के कष्टों को सहते हुए समाज में परिवर्तन एवं समाजसेवा को विशेष ध्यान रखा तथा साथ ही साथ धार्मिक कार्यों में भी उल्लेखनीय कार्य था जैसे कि भोले बाबा सम्बन्धित, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, महेश्वर आदि कई मंदिरों का निर्माण कराया जो कि वास्तविक लगता है। मैं ज्ञान चन्द्रवशी जी को इनके इस कार्य के लिए साधुवाद देता हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में सभी कलाकारों को इस नाट्य प्रस्तुति के लिए में धन्यवाद देता हूँ। इसके बाद उद्घोषक महोदय ने कलाकारों का पात्र परिचय कराया गया जो कि इस प्रकार हैः- अहिल्याबाई होल्कर प्रियांशी शुक्ला, मल्हार राय होल्कर- राहुल गौड यशवन्त राय होल्कर (दामाद) हर्ष पाण्डेय, गंगाधर राव-भूपेन्द्र सिंह, नाना फण्डनवीस-राजेश कुमार, मुक्ताबाई-खुशीयादव, अहिल्याबाई (किशोर) असिता कुशवाहा, मालेराव-रावित रमन, खण्डेराव- रूद्र प्रताप, सूत्रधार एवं कोरस-वेदान्त धुरिया, अमरदीप, अनामिका, सरिता, अजय चौरसिया, प्रिंस, खुशी, सैनिक राजेश कुमार, ब्राह्मण-सुमित पाण्डेय आदि इसके बाद संस्था के अध्यक्ष सुरेश चन्द्रा ने हरिहर गंगा आरती के एवं महासचिव काशी प्रान्त के उपाध्यक्ष माननीय अवधेश चन्द्र गुप्ता जी द्वारा सभी दर्शकों को धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

Anveshi India Bureau

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