वैसे तो शहर के आठ से दस मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं। जिसमें द्रौपदी घाट के मौर्य बस्ती में बाढ़ की पानी से करीब 50 घर डूब गए हैं। इस बस्ती के घरों में पानी भर जाने के बाद भी अधिकतर लोग मकान की छतों पर सामान रखकर खुले में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
वैसे तो शहर के आठ से दस मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं। जिसमें द्रौपदी घाट के मौर्य बस्ती में बाढ़ की पानी से करीब 50 घर डूब गए हैं। इस बस्ती के घरों में पानी भर जाने के बाद भी अधिकतर लोग मकान की छतों पर सामान रखकर खुले में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। वहीं बच्चों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिए हैं। उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान हर साल ऐसी ही तबाही आती हैं, जिससे दो से तीन माह उन्हें परेशानियों से जूझना पड़ता हैं।
अरविंद मौर्य , मदन मौर्या, सोनू कुमार, अशोक, रूपचंद्र, राजकुमार उर्फ लल्लू का कहना है कि तीन दिन से उनके घर बाढ़ की पानी से डूब गए है। मोहल्ले के 12 लोगों ने बाढ़ राहत शिविर में शरण लिया हैं। योगेंद्र मौर्या का कहना है कि 50 घर बाढ़ से प्रभावित हैं। इसमें रामबाबू पाल की गाय डूबने की वजह से मर गई हैं। लोगों ने बताया कि पशुओं को आसपास के खाली प्लाटों में रखा गया हैं। 12 लोग बाढ़ राहत शिविर में चले गए हैं। मकानों की छत पर सामान आदि रखें गए हैं। टायर की नाव बनाकर सामानों को इधर – उधर किया जा रहा हैं।


Courtsy amarujala



