इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी अस्पताल मरीजों को सिर्फ पैसा निकालने के लिए एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी अस्पताल मरीजों को सिर्फ पैसा निकालने के लिए एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। न्यायालय ने 2008 के एक मामले में चिकित्सा लापरवाही के आरोपी एक डॉक्टर को राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें सर्जरी में कथित देरी के कारण एक भ्रूण की मौत हो गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की पीठ ने डॉ. अशोक कुमार राय की याचिका खारिज करते हुए दिया।
मामला देवरिया जिले से जुड़ा है। 29 जुलाई 2007 एक मामला दर्ज किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता के छोटे भाई की गर्भवती पत्नी को डॉ. राय के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। परिवार ने सुबह 11 बजे सिजेरियन सर्जरी के लिए सहमति दी थी, लेकिन सर्जरी शाम 5:30 बजे की गई, तब तक भ्रूण की मृत्यु हो चुकी थी। आरोप है कि परिवार द्वारा आपत्ति जताने पर नर्सिंग होम के कर्मचारियों और सहयोगियों ने उनकी पिटाई भी की। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि डॉक्टर ने 8,700 लिए और 10,000 अतिरिक्त मांगे। साथ ही डिस्चार्ज स्लिप भी जारी करने से इनकार कर दिया। दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने के लिए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।



