Wednesday, February 18, 2026
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रूद्राक्ष की माला स्वयं में भगवान भोलेनाथ का साक्षात स्वरूप है 

कर्तव्य परिवार पथ के द्वारा आयोजित मुंशी राम प्रसाद की बगिया नारायण वाटिका में श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा का रसपान कराते हुए आचार्य सतानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान भोले नाथ सिर्फ एक बेलपत्र भक्तों के द्वारा अर्पित किए जाने पर प्रसन्न हों जाते और भक्तो के द्वारा विधि विधान से पार्थिव शिवलिंग बनाकर रूद्राभिषेक करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है और कहा कि भगवान शिव की रूद्राक्ष की माला स्वयं में भगवान भोलेनाथ का साक्षात स्वरूप है क्योंकि यह भगवान शिव के नेत्र से प्रकट हुआ है इसलिए मनुष्य को रूद्राक्ष की माला धारण करना चाहिए जो जीवन के अंत समय में मनुष्य के पापों को नष्ट कर देता है महाराज जी ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण,बेल पत्र, भष्म, तिलक और रुद्राक्ष माला का महात्म्य का वर्णन किया ।

 

आज की कथा में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विवाह महोत्सव का आयोजन किया इस अवसर मिश्र बंधु भजन गायक ने अपने भजनों की प्रस्तुति दी

संचालन राजेश केसरवानी ने किया स्वागत राजेंद्र केसरवानी शैलेन्द्र केसरवानी ने किया ।मुख्य यजमान पूर्व पार्षद राम बाबू केसरवानी रहे।

कथा की महाआरती मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी,हरी ओम केसरवानी (सी ए) कुमार नारायण, पार्षद आशीष द्विवेदी, रितेश मिश्रा,राजीव राज अग्रवाल,,सपना सिंह आर्या, ज्ञान सिंह, यादव,पार्षद नीरज केसरवानी जय श्री केसरवानी, साधना चतुर्वेदी, उर्मिला केसरवानी,उषा केसरवानी, आशा केसरवानी, विमला जायसवाल,आदि सैकड़ों महिलाएं और कर्तव्य पथ परिवार के सदस्यगण रहे।

 

Anveshi India Bureau

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