बैराज से छोड़े गए पानी के बाद उफनाई गंगा और यमुना नदी का जलस्तर बुधवार को भी दिनभर बढ़ता रहा। इससे बाढ़ की चपेट में आए गांवों की मुसीबत और बढ़ गई थी। बाढ़ प्रभावित कछार का बदरा गांव तो टापू में तब्दील हो गया है।
बैराज से छोड़े गए पानी के बाद उफनाई गंगा और यमुना नदी का जलस्तर बुधवार को भी दिनभर बढ़ता रहा। इससे बाढ़ की चपेट में आए गांवों की मुसीबत और बढ़ गई थी। बाढ़ प्रभावित कछार का बदरा गांव तो टापू में तब्दील हो गया है। बुधवार की सुबह ही गांव की बिजली आपूर्ति भी काट दी गई। इससे गांव के तकरीबन 800 घरों में शाम होते ही अंधेरा पसर गया। बिजली गुल होने से बदरा गांव में जलापूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है।
बढ़े हुए जलस्तर के कारण नई और पुरानी झूंसी के तटवर्ती इलाकों में बसे मठ, मंदिर, आश्रम और श्मशान घाट भी जद में आ गए हैं। बाढ़ के कारण छतनाग श्मशान घाट पर लोग जानजोखिम में डालकर एक नाव पर तीन से चार कुंतल लकड़ी, उसी पर शव और कई ग्रामीण बैठकर ऊंचाई पर जाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन इससे पूरी तरह अंजान बना हुआ है।



