प्रयागराज। शंभूनाथ रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल, झलवा, प्रयागराज में चल रही आठ दिवसीय कार्यशाला के तीसरा और चौथा दिन बी.एस.सी नर्सिंग 6th एवं 8th सेमेस्टर के विद्यार्थियों को “FBNBc (Facility Based Newborn Care), ENBC (Essential Newborn Care), IMNCI (Integrated Management of Neonatal and Childhood Illness) एवं PLS (Pediatric Life Support)” विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का संचालन विद्यांता स्किल इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम के विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्री डेनी सिबी एवं सुश्री फियोना कुरियाकोज़ द्वारा किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को नवजात शिशुओं की प्रारंभिक देखभाल, उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान, आपातकालीन परिस्थितियों में शिशु पुनर्जीवन (Resuscitation) तथा बाल रोगों के समन्वित प्रबंधन की गहन जानकारी प्रदान करना था। प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को नवजात शिशु की तत्काल देखभाल, तापमान बनाए रखने की तकनीकें, स्तनपान प्रारंभ कराने की विधियाँ, नवजात संक्रमण की पहचान, एवं बाल रोगों में प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया का प्रदर्शन कराया। साथ ही पेडियाट्रिक लाइफ सपोर्ट (PLS) के अंतर्गत आपातकालीन स्थितियों में बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट, सीपीआर, तथा जीवन रक्षक उपायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर संस्थान के सचिव कौशल कुमार तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “नवजात एवं बाल देखभाल नर्सिंग का अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदार क्षेत्र है। ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हैं। एस.आई.ई.टी. के निदेशक डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि “FBNBc, ENBC और IMNCI जैसे विषय नर्सों को बाल स्वास्थ्य सेवा की मूलभूत समझ प्रदान करते हैं। “ऐसे मॉड्यूल विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल को मजबूत करते हैं और उन्हें एक कुशल, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नर्स बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। संस्थान के प्राचार्य डॉ. संतोष एस. यू. ने कहा कि ये प्रशिक्षण विद्यार्थियों को अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं शिशु देखभाल देने में सक्षम बनाएंगे। इस अवसर पर डॉ. कमलेश तिवारी (मनोवैज्ञानिक) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान शारीरिक बदलावों के साथ-साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव आम हैं, जैसे चिंता, उदासी या मूड स्विंग। उन्होंने समझाया कि सही जानकारी, परिवार और समाज का समर्थन, और आत्म-देखभाल जैसे पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और हल्की-फुल्की व्यायाम या योग इस दौर को स्वस्थ और सकारात्मक बनाने में मदद करते हैं।एस.आई.ई.टी. के डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर प्रो.डी.पी. अग्निहोत्री एवं एस.आई.ई.टी. के मुख्य वित्त अधिकारी ओ.पी. गर्ग ने भी सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि इस वर्कशॉप में सीखने का उत्साह बनाए रखें, अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाएँ, और हमेशा सकारात्मक और मेहनती बने रहें। उनके आशीर्वाद ने कार्यक्रम को और भी प्रेरणादायक बना दिया।कार्यशाला का संचालन श्रीमती बेबी जैसवाल एवं सुश्री रीता पोखरिया द्वारा किया गया। विद्यार्थियों ने इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और नवजात तथा बाल स्वास्थ्य देखभाल के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से सीखा।


Anveshi India Bureau



