नेहरू ग्राम भारती (मानित विश्वविद्यालय), जमुनीपुर, प्रयागराज के विशेष शिक्षा संकाय द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रायोजन में आयोजित द्विदिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का समापन दूसरे दिन गहन विमर्श और सार्थक संवाद के साथ हुआ। कार्यशाला के समापन सत्र में दिव्यांगजनों के विधिक अधिकार, सामाजिक न्याय, रोजगार, कौशल विकास और समग्र सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समापन सत्र का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके विधिक अधिकारों, आरक्षण प्रावधानों एवं सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना रहा। साथ ही चिकित्सा, शिक्षा, विधि, प्रशासन एवं सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच संवाद को सुदृढ़ कर समाज में समावेशी दृष्टिकोण को मजबूत आधार प्रदान किया गया। कार्यशाला में दिव्यांगजन हेतु रोजगार, स्वरोजगार एवं कौशल विकास के अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सफल उदाहरणों और श्रेष्ठ व्यवहारों के प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला के प्रमुख उपविषयों में विधिक सहायता एवं शिकायत निवारण, सामाजिक न्याय, सरकारी कल्याणकारी योजनाएं व आरक्षण, तथा रोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास शामिल रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, चिकित्सा एवं पुनर्वास विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, शोधार्थी, दिव्यांगजन एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कुलसचिव श्याम सुंदर मिश्र ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। मुख्य वक्ता डॉ. निहार रंजन मिश्रा, अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय, जगद्गुरु रामभद्राचार्य राज्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट ने दिव्यांगता की समझ, उसके प्रकार, कारण एवं शीघ्र पहचान पर वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
डॉ. स्वप्निल त्रिपाठी, अधिष्ठाता, विधि संकाय, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय ने न्याय तक पहुंच, विधिक सहायता और शिकायत निवारण तंत्र पर प्रकाश डालते हुए अधिकार-आधारित दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया। कुलसचिव श्याम सुंदर मिश्र ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में डिजिटल, सहायक एवं आईसीटी उपकरणों के उपयोग को समय की आवश्यकता बताया।
राकेश कुमार, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय ने दिव्यांगजनों के मानसिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक देखभाल एवं परामर्श की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम संचालन कर रहीं डॉ. वंदना मिश्रा ने दिव्यांगता प्रमाणन एवं मूल्यांकन में चिकित्सा संस्थानों की भूमिका पर सारगर्भित विचार रखे।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) हिमांशु शेखर झा, राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश ने दिव्यांगजनों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि अभय कुमार श्रीवास्तव, उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। पुरस्कार वितरण जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अशोक कुमार गौतम द्वारा किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रोहित रमेश ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020, समावेशन और सामाजिक न्याय की अवधारणाओं के अनुरूप है तथा दिव्यांगजन की शिक्षा, संवाद क्षमता निर्माण और नीति-प्रचार की दिशा में एक सशक्त पहल है। विशिष्ट उद्बोधन प्रति कुलपति प्रो. एस. सी. तिवारी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक डॉ. दीपक त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा अनुवादक अपराजिता पाण्डेय द्वारा श्रवण बाधित प्रतिभागियों के लिए प्रभावी अनुवाद की व्यवस्था की गई। इस अवसर पर वित्त अधिकारी विनोद कुमार पाण्डेय, शोध निदेशक आशीष शिवम, बृजेंद्र मणि त्रिपाठी, डॉ. आलोक मिश्र, डॉ. संतेश्वर मिश्र, भूप नारायण शुक्ल, अरविंद शुक्ल, अमित पाण्डेय सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समापन पर यह निष्कर्ष निकला कि द्विदिवसीय कार्यशाला न केवल जागरूकता बढ़ाने और समावेशी व्यवहार को प्रोत्साहित करने में सफल रही, बल्कि जिला स्तर पर दिव्यांगजन से संबंधित नीतियों एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक मजबूत सेतु के रूप में उभरी।
Anveshi India Bureau



