Wednesday, January 28, 2026
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दुनिया में क्रिकेट का कारोबार, कप्तान कौन?: कमाई में BCCI के आगे नहीं टिकता पाकिस्तान, आंकड़े देख चौंक जाएंगे!

बांग्लादेश को टी20 विश्व कप से बाहर किए जाने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने खुलकर विरोध जताया है और विश्व कप के बहिष्कार की गीदड़भभकी भी दे चुका है। अब बताया जा रहा है कि आईसीसी ‘ट्रॉफी चोर’ नकवी के बयान से खफा है। नकवी ने जोश में होश गंवाते हुए बड़बोलापन दिखाया, लेकिन वह यह भूल गया कि क्रिकेट का संचालन आईसीसी करती है। अगर पाकिस्तान टी20 विश्व कप में हिस्सा नहीं लेता है तो आईसीसी उस पर कड़ी कार्रवाई करने की भी तैयारी में है।

 

टी20 विश्व कप 2026 में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। बांग्लादेश के भारत में न खेलने की जिद के बाद आईसीसी ने टीम को टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया। अब पाकिस्तान भी गीदड़भभकी दे रहा है कि वह भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होने वाले टूर्नामेंट से नाम वापस लेने पर विचार कर सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने कहा है कि वह शुक्रवार या फिर दो फरवरी को अपना फैसला सुना देंगे। इस पर पाकिस्तान सरकार से बातचीत जारी है।

पाकिस्तान का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है। उसके मैच को हाईब्रिड मॉडल के अनुसार श्रीलंका में होने हैं, फिर भी किसी और के मामले में टांग अड़ाने की उसकी आदत गई नहीं है। हालांकि, पाकिस्तान की यह गीदड़भभकी, उन्हें ही काफी भारी पड़ सकती है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि आईसीसी का रेवेन्यू मॉडल बताते है। पाकिस्तान का ढोल पीटना कि वह नहीं खेलेगा के पीछे की असली सच्चाई कुछ और ही है। आइए जानते हैं…

पाकिस्तान की गीदड़भभकी की अब आदत पड़ चुकी

 

 

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पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की सबसे प्रमुख रणनीति अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों पर राजनीतिक दबाव बनाने की रही है। चाहे भारत में होने वाले आईसीसी इवेंट हों या खुद उनके देश में आयोजित होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी, पीसीबी बार-बार बहिष्कार की संभावना जताकर एक तरह की वार्ता स्थिति बनाता है। पाकिस्तान की दलील यह होती है कि हमें बाहर करो तो आईसीसी की अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी,  लेकिन जब इस दावे को आईसीसी के आधिकारिक वित्तीय मॉडल, प्रसारण आंकड़ों और वैश्विक क्रिकेट बाजार के 2025 के आंकड़ों पर रखा जाता है, तो तस्वीर अलग दिखती है। पाकिस्तान प्रभावशाली तो है, पर निर्णायक नहीं।

आईसीसी एक इवेंट बिजनेस है, कोई मेंबर के फंड से चलने वाला क्लब नहीं

 

 

 

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आईसीसी कोई फंडिंग क्लब नहीं, बल्कि इवेंट बिजनेस है। आईसीसी के लिए उसके इवेंट्स (विश्व कप, टी20 विश्व कप आदि) उसकी नकद मशीन हैं।

इसके 2024 के ऑडिटेड अकाउंट्स यह स्पष्ट करते हैं-

 

  • 2024 में कुल राजस्व: 777.9 मिलियन यूएस डॉलर
  • इवेंट्स से राजस्व: 728.5 मिलियन यूएस डॉलर
  • नेट सरप्लस: 474 मिलियन यूएस डॉलर

इसके पिछले साल यानी साल 2023 में

 

  • कुल राजस्व: 904.4 मिलियन यूएस डॉलर
  • इवेंट्स से राजस्व: 839.2 मिलियन यूएस डॉलर
  • नेट सरप्लस: 596 मिलियन यूएस डॉलर

इन आंकड़ों से दो बातें निकलती हैं:

 

  • आईसीसी का दबाव वहीं होगा जहां इवेंट की वैल्यू हिले। इसका मतलब है कि बॉयकॉट की धमकी तभी असरदार होती है जब वह टूर्नामेंट की कमर्शियल वैल्यू को छू सके।
  • आईसीसी राजस्व में पाकिस्तान का हिस्सा मायने रखता है, पर एक तय सीमा के साथ। 2024-27 डिस्ट्रिब्यूशन साइकिल के मुताबिक, पाकिस्तान को आईसीसी के रेवेन्यू का 5.75% हिस्सा मिलता है, जबकि भारत को 38.5%।
  • साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से आईसीसी को कुल राजस्व का लगभग 80% मिलता है। 2024-27 आईसीसी मीडिया राइट्स (इंडियन मार्केट) का मूल्य, तीन बिलियन यूएस डॉलर यानी 27,540 करोड़ रुपये है।
  • यह अनुपात पीसीबी की स्थिति स्पष्ट कर देता है। पाकिस्तान आईसीसी का बड़ा सदस्य जरूर है, पर आर्थिक धुरी नहीं।

पाकिस्तान से आईसीसी को क्या फायदा है?

पाकिस्तान के पास तीन मुख्य प्रभाव बिंदु हैं:

1. प्रसारण बाजार
आईसीसी ने पाकिस्तान में पीटीवी और मायको को ब्रॉडकास्ट पार्टनर घोषित किया है, लेकिन डील की कीमत सार्वजनिक नहीं है। इसलिए यह दावा कि पीसीबी की मार्केट वैल्यू आईसीसी को आर्थिक रूप से प्रभावित कर सकती है। हालांकि, आंकड़े उपलब्ध नहीं है और यह बस कयास हैं।

2. भारत-पाकिस्तान जैसे प्रीमियम मैच
यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा वास्तविक प्रभाव क्षेत्र है। भारत-पाकिस्तान मुकाबला दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले स्पोर्ट्स मैच में से है। इसलिए पाकिस्तान का प्रभाव रेवेन्यू जनरेशन में नहीं, बल्कि व्यूअरशिप को लेकर है।

3. टूनार्मेंट की प्रतिस्पर्धात्मकता
पाकिस्तान के बिना टूर्नामेंट में ड्रामा कम होता है। मीडिया ज्यादा हल्ला नहीं करती। राजनीतिक मूल्य भी घटता है। मैच इन्वेंट्री कमजोर होती है। परंतु यह आर्थिक नियंत्रण में तब्दील नहीं होता।

पाकिस्तान के बॉयकॉट की स्थिति में क्या होगा?

 

यदि पाकिस्तान विश्व कप बॉयकॉट करता है तो आईसीसी पर केवल तीन स्तरों पर असर दिखेगा:

  1. ब्रांड और प्रतिस्पर्धा: टूर्नामेंट का ब्रांड कमजोर होगा। राजनीतिक हेडलाइनें बढ़ेंगी।
  2. प्रीमियम मैच का नुकसान: सबसे बड़ा नुकसान, भारत-पाकिस्तान मैच का गायब होना होगा। यह विज्ञापन/टीवी रेटिंग्स को भारी झटका हो सकता है।
  3. कॉन्ट्रैक्ट रियलिटी: मुख्य राइट्स डील्स मल्टी-लेयर होते हैं। पहले से साइन की गई डील्स री-नेगोशिएट नहीं हो सकतीं, जब तक क्लॉज मौजूद न हो। इसलिए बॉयकॉट से भविष्य के आईसीसी रिस्क बढ़ता है, विज्ञापन पैकेजिंग बदलती है, बोली लगाते समय बोली लगाने वाले थोड़े चौकन्ने हो जाते हैं। इसका मतलब है कि तुरंत आर्थिक पतन नहीं होगा, बल्कि भविष्य की वैल्यू को नुकसान पहुंच सकता है।

पीसीबी के खुद महंगा पड़ेगा बॉयकॉट करना

बहिष्कार किसी एकतरफा हथियार की तरह नहीं, बल्कि दोनों तरफ चोट पहुंचाने वाला निर्णय है। इससे पाकिस्तान को भी ये अंजाम भुगतना पड़ेगा-

  • मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर पाकिस्तान अपने गीदड़भभकी वाले रवैये पर अडिग रहा और उसने विश्व कप में खेलने से मना किया तो आईसीसी इस बार उसे कड़ा सबक सिखाएगा।
  • आईसीसी पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा सकता है जिसमें किसी भी द्विपक्षीय सीरीज का निलंबन रहना शामिल है। यानी कोई भी टीम पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल सकेगी।
  • इतना ही नहीं पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों के खेलने पर भी एक तरह से रोक लगेगी और इन खिलाड़ियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिया जाएगा।
  • इसके अलावा पाकिस्तान टीम एशिया कप में भी हिस्सा नहीं ले सकेगी। ध्यान रहे कि पीसीबी का आर्थिक मॉडल आईसीसी के रेवेन्यू, पाकिस्तान सुपर लीग और प्रसारण पर ही निर्भर है।

अब आते हैं 2025 की वैश्विक क्रिकेट अर्थव्यवस्था पर

 

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कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक क्रिकेट राजस्व (2025) 3.84 बिलियन यूएस डॉलर यानी 35,252 करोड़ रुपये का है और 2029 तक इसे 4.21 बिलियन यूएस डॉलर यानी 38,649 करोड़ रुपये तक करने का प्रोजेक्ट है। विश्व क्रिकेट की आर्थिक संरचना असमान है। कुछ देश ही असली धुरी हैं। इसमें बीसीसीआई शीर्ष पर है। (नोट: आंकड़े 2024 के आखिर या शुरुआती 2025 तक प्रकाशित नेट एसेट्स और वित्तीय विवरणों के आधार पर हैं।)

भारत (BCCI): क्रिकेट की आर्थिक धुरी

 

  • दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट संस्था: बीसीसीआई को दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड माना जाता है, जिसकी नेट वर्थ करीब 2.25 बिलियन यूएस डॉलर यानी 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है। यह बाकी सभी क्रिकेट बोर्ड्स को मिलाकर भी वित्तीय रूप से पीछे छोड़ देता है। (आंकड़े कई मीडिया रिपोर्ट्स से उठाए गए हैं)
  • ग्लोबल क्रिकेट फाइनेंस का 62% भारत से: साल 2025 में ग्लोबल क्रिकेट का कुल राजस्व 3.84 बिलियन यूएस डॉलर यानी 35,252 करोड़ रुपये माना गया, जिसमें से बीसीसीआई अकेले 2.38 बिलियन यूएस डॉलर यानी 21,849 करोड़ रुपये (62%) जनरेट करता है। इसका मतलब क्रिकेट की आर्थिक धुरी भारत है।
  • IPL, बीसीसाई की सबसे बड़ी ताकत: आईपीएल की वैल्यू 18.5 बिलियन यूएस डॉलर यानी 1,69,835 करोड़ रुपये की है। आईपीएल ब्रॉडकास्ट राइट्स (2023–27) की वैल्यू 6.2 बिलियन यूएस डॉलर यानी 56,917 करोड़ रुपये की आंकी गई है। आईपीएल ने भारत को दुनिया का सबसे महंगा स्पोर्ट्स इवेंट मार्केट बना दिया है और यही BCCI की कमाई का सबसे बड़ा स्त्रोत है।
  • ICC राजस्व वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा: आईसीसी हर साल 600 मिलियन यूएस डॉलर यानी 5,508 करोड़ रुपये अपने मेंबर देशों में बांटता है। इसमें से बीसीसीआई का हिस्सा 38.5% है। यानी 230 मिलियन यूएस डॉलर यानी 2,111 करोड़ रुपये प्रति वर्ष सिर्फ आईसीसी से आता है। यह दिखाता है कि ICC की रेवेन्यू मॉडल में भारत की निर्णायक भूमिका है।
  • वैश्विक टीवी ब्रॉडकास्टिंग में भारत की पकड़: आईसीसी ने माना है कि उसकी 85% टीवी रेवेन्यू भारत से आती है इसका मतलब है कि ब्रॉडकास्टर्स और एडवर्टाइजर्स भारत पर निर्भर हैं। इसलिए आईसीसी के लिए भारत को कभी नजरअंदाज करना संभव नहीं है।
  • भारत का घरेलू ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सर इकोसिस्टम: भारत में क्रिकेट के लिए टीवी राइट्स, ओटीटी राइट्स, स्पॉन्सरशिप, टीम और सीरीज राइट्स में दुनिया की सबसे बड़ी बोली लगती है। ये सभी BCCI को स्थायी और विशाल आर्थिक ताकत देते हैं।
  • वार्षिक कमाई- लगभग $1.95 बिलियन: वित्तीय वर्ष 2023-24 में बीसीसीआी ने 16,313 करोड़ रुपये (करीब 1.95 बिलियन यूएस डॉलर) कमाए। इतनी कमाई किसी भी अन्य क्रिकेट बोर्ड के लिए कल्पना से बाहर है।

क्यों बीसीसीआई दुनिया पर असर डालता है?

 

  • भारत में क्रिकेट मास मार्केट स्पोर्ट है
  • बड़ी संख्या में टीवी, ओटीटी और सोशल मीडिया दर्शक
  • आईपीएल से फ्रेंचाइज-सिस्टम की कमाई
  • आईसीसी का सबसे बड़ा कमर्शियल स्टेकहोल्डर
  • बड़े ब्रांड्स भारत में पैसा खर्च करने को तैयार
  • इन वजहों से क्रिकेट का वाणिज्यिक नियंत्रण भारत के पास है। बीसीसीआई ने यह कमाई खुद की मेहनत और स्ट्रैटजी से की है। यही वजह है कि पाकिस्तान खुन्नस खाता है और नीचा दिखाने में लगा रहता है।

ऑस्ट्रेलिया (CA) और इंग्लैंड (ECB): मजबूत पर बीसीसीआई से काफी दूर

 

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क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA): 

 

  • नेट वर्थ- 79 मिलियन डॉलर: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया दुनिया का दूसरा सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है। इसकी कुल संपत्ति लगभग 79 मिलियन डॉलर आंकी गई है, जो बताती है कि उसके पास संचालन, विकास और लीग चलाने के लिए मजबूत आर्थिक आधार है। (आंकड़े कई मीडिया रिपोर्ट्स से उठाए गए हैं)
  • बिग बैश लीग (BBL) से बड़ी कमाई: BBL ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी टी20 लीग है। इस लीग से टिकट बिक्री, प्रायोजक, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और डिजिटल व्यूअरशिप के जरिए करोड़ों की कमाई होती है। यह लीग सीए की कमाई में सबसे बड़ा योगदान देती है।
  • वार्षिक राजस्व (FY 2023–24)- 456.66 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 456.66 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर की कमाई दर्ज की। इसमें घरेलू सीरीज, BBL, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले, ब्रॉडकास्टिंग, और आईसीसी की सहायता रकम शामिल रहती है।
  • नेट सरप्लस (FY 2023–24)- 10.62 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर: सभी खर्च निकालने के बाद भी सीए के पास 10.62 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर का अधिशेष (surplus) बचा। यह दिखाता है कि बोर्ड न सिर्फ कमाता है बल्कि आर्थिक रूप से स्थिर व लाभ में है।
  • ICC से वितरण राशि- 37.53 मिलियन डॉलर/वर्ष (6.25% हिस्सा): ICC हर वर्ष अपने कुल राजस्व का एक हिस्सा सदस्य देशों को देता है। CA को लगभग 37.53 मिलियन डॉलर हर साल मिलते हैं, जो कुल ICC कमाई का 6.25% हिस्सा है। यह राशि ICC टूर्नामेंट्स, मीडिया राइट्स और वैश्विक ब्रॉडकास्टिंग से आती है।
  • ब्रॉडकास्टिंग राइट्स- मजबूत इनकम सोर्स: ऑस्ट्रेलिया के पास घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रसारण सौदे बेहद मजबूत हैं। टीवी चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्रिकेट के प्रसारण के अधिकार बेचकर बोर्ड करोड़ों की कमाई करता है। यही वजह है कि सीए की आर्थिक सेहत लगातार मजबूत रहती है।

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इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)

 

  • नेट वर्थ – 59 मिलियन डॉलर: ईसीबी दुनिया का तीसरा सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड माना जाता है। 59 मिलियन डॉलर की नेट वर्थ यह दिखाती है कि इंग्लैंड का क्रिकेट ढाँचा आर्थिक रूप से काफी मजबूत और स्थिर है। (आंकड़े कई मीडिया रिपोर्ट्स से उठाए गए हैं)
  • द हंड्रेड टूर्नामेंट, रेवेन्यू जनरेट करने का नया स्त्रोत: ईसीबी ने हाल के वर्षों में द हंड्रेड नाम की 100-गेंद फॉर्मेट लीग शुरू की, जो टी20 से अलग और नई ऑडियंस को आकर्षित करती है। इस टूर्नामेंट से ब्रॉडकास्टिंग, टिकट सेल्स, मर्चेंडाइज और स्पॉन्सरशिप के जरिए नई कमाई होती है, जिससे ECB की कुल आय बढ़ी है।
  • ICC रेवेन्यू शेयर- 41 मिलियन डॉलर/वर्ष (6.89% हिस्सा): आईसीसी अपने कुल राजस्व का हिस्सा सदस्य बोर्ड्स को बांटता है। ईसीबी को 41 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष मिलते हैं, जो आईसीसी की कुल कमाई का 6.89% हिस्सा है। यह साबित करता है कि इंग्लैंड वैश्विक क्रिकेट पर प्रभावशाली बोर्ड्स में शामिल है।
  • क्रिकेट का पारंपरिक घर- मजबूत फॉलोइंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर: इंग्लैंड को अक्सर क्रिकेट का घर कहा जाता है, क्योंकि यहीं इस खेल की शुरुआत हुई। यहां क्रिकेट का गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है, दर्शक स्थिर हैं और लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान मौजूद हैं। इस ऐतिहासिक व पारंपरिक शक्ति से बोर्ड की आर्थिक और ब्रांड वैल्यू दोनों मजबूत होती हैं।
  • काउंटी क्रिकेट- मजबूत आर्थिक मॉडल: ईसीबी के तहत 18 फर्स्ट-क्लास काउंटीज क्रिकेट खेलती हैं। साल 2023 में इन 18 काउंटियों ने 306.1 मिलियन पाउंड की कुल कमाई दर्ज की। काउंटी क्रिकेट से टिकट बिक्री, प्रसारण, सदस्यता और स्थानीय स्पॉन्सरशिप मिलती है, जो इंग्लैंड की क्रिकेट अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है।

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB)
  • नेट वर्थ- 55 मिलियन डॉलर: पीसीबी की कुल नेट वर्थ लगभग 55 मिलियन डॉलर यानी 504 करोड़ रुपये है। एशियाई क्रिकेट बोर्ड्स में यह एक मध्यम, लेकिन स्थिर आर्थिक संरचना माना जाता है। पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर खर्च अधिक होता है, इसलिए नेट वर्थ सीमित रहती है। (आंकड़े कई मीडिया रिपोर्ट्स से उठाए गए हैं)
  • वार्षिक राजस्व 2023-24 में 120-135 मिलियन डॉलर: वित्तीय वर्ष 2023-24 में पीसीबी का वार्षिक राजस्व 120 से 135 मिलियन डॉलर यानी 1,101 करोड़ से 1,239 करोड़ के बीच रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में 40% अधिक है, जो पीसीबी की आर्थिक स्थिति में सुधार को दर्शाता है। राजस्व वृद्धि का मुख्य कारण पीएसएल की कमाई, आईसीसी वितरण, प्रसारण अधिकार और स्पॉन्सरशिप है।
  • ICC वितरण हिस्सा- 34.51 मिलियन डॉलर/वर्ष (5.75% हिस्सा): आईसीसी हर सदस्य बोर्ड को अपनी कमाई का हिस्सा देता है। पीसीबी को प्रति वर्ष 34.51 मिलियन डॉलर यानी करीब 317 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो आईसीसी वितरण का 5.75% हिस्सा है। यह आईसीसी के टॉप शेयरधारक देशों में पीसीबी की भूमिका को मजबूत बनाता है।
  • पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) प्रमुख राजस्व स्त्रोत: PCB का सबसे बड़ा आर्थिक आधार पाकिस्तान सुपर लीग है। पीएसएल से पीसीबी को प्रसारण अधिकार, टिकट बिक्री, फ्रेंचाइज फीस और स्पॉन्सरशिप से भारी कमाई होती है। पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अनियमितता और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद, पीसीबी ने पीएसएल और आईसीसी शेयर की बदौलत वित्तीय मजबूती बनाए रखी है।
  • यही वजह है कि नाम वापस लेने पर उसका भारी नुकसान हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कई शिकायतें भी आईं और वहां काम करने वालों को और यहां तक कि खिलाड़ियों और कोच को उनकी सैलरी नहीं दी गई। ऐसे में पाकिस्तान यह जोखिम नहीं उठा सकता। साथ ही नाम वापस लेने पर अगर आईसीसी विदेशी खिलाड़ियों को एनओसी देने से मना करवाता है तो पीएसएल की भी लोकप्रियता घट जाएगी।

अब वापस आते हैं PCB के बहिष्कार दांव पर

 

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इन सभी आंकड़ों के आधार पर यह साफ है कि पाकिस्तान आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, पर निर्णय लेने वाला शक्ति नहीं है। इसलिए PCB का बॉयकॉट अधिकतर:
  • राजनीतिक संकेत
  • कूटनीतिक दबाव
  • मीडिया नैरेटिव
  • सौदेबाजी का फायदा उठाना के रूप में काम करता है।

पाकिस्तान आईसीसी क फैसलों में विघ्न डालने वाला काम कर सकता है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच बहुत बड़ा व्यवसायिक मुकाबला है। पर पाकिस्तान आईसीसी को हुक्म नहीं दे सकता, क्योंकि आर्थिक धुरी भारत-केंद्रित है। आईसीसी की इकोनॉमी डेटा से चलने वाली है, भावनात्मक नहीं। टी20 विश्व कप 2026 बॉयकॉट का नुकसान आईसीसी से कहीं ज्यादा पीसीबी को होगा। इसलिए पीसीबी का बॉयकॉट कार्ड हेडलाइन तो बनाता है लेकिन आईसीसी इकोसिस्टम नहीं बदलता। यही वजह है कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और एशिया कप 2025 में बहिष्कार की गीदड़भभकी देने के बाद भी पाकिस्तान को खेलना पड़ा था और बेइज्जती हुई थी, सो अलग।

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