Monday, February 2, 2026
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UPPSC : राइटर्स क्रैंप से पीड़ित अभ्यर्थी को अलग से मिलेगा लेखक, हाईकोर्ट के आदेश पर आयोग ने की व्यवस्था

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से राइटर्स क्रैंप बीमारी से ग्रसित अभ्यर्थी गोपाल जी को समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) मुख्य परीक्षा-2023 में श्रुतलेखक (स्क्राइब) उपलब्ध कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से राइटर्स क्रैंप बीमारी से ग्रसित अभ्यर्थी गोपाल जी को समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) मुख्य परीक्षा-2023 में श्रुतलेखक (स्क्राइब) उपलब्ध कराया जाएगा। यूपीपीएससी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अभ्यर्थी को यह सुविधा मुहैया कराई है।

हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी चार दिसंबर 2019 के शासनादेश में इस बीमारी का उल्लेख नहीं है। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आयोग की ओर से झांसी निवासी अभ्यर्थी गोपाल जी को इस शर्त के साथ अलग से लेखक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी कि स्क्राइब की योग्यता उस परीक्षा में उपस्थित होने की न्यूनतम योग्यता से कम से कम दो शैक्षणिक वर्ष और अधिकतम तीन शैक्षणिक वर्ष कम होनी चाहिए।

आयोग के उप सचिव वीरेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से अभ्यर्थी को सूचना दी गई है कि वह श्रुतलेखक अपने साथ लाएगा जिसे आयोग की ओर से कोई यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। अतिरिक्त समय की मांग पर 20 मिनट प्रति घंटे दिए जाएंगे। अभ्यर्थी परीक्षा से एक दिन पूर्व या परीक्षा वाले दिन अपने केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक को श्रुतलेखक एवं अतिरिक्त समय की सूचना देगा। अभ्यर्थी अपने साथ परिचय पत्र एवं दो फाेटो लाएगा। श्रुतलेखक आईडी प्रूफ, आधार कार्ड की प्रति, एड्रेस प्रूफ की प्रति एवं अंतिम धारित शैक्षिक अर्हता से संबंधित अभिलेख की स्वप्रमाणित प्रति भी साथ लाएगा।
यह है राइटर्स क्रैंप बीमारी

अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र जैन के अनुसार इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के हाथ में लिखते वक्त कंपन होने लगता है। कंपन के कारण पेन हिलता रहता है और लिखना मुश्किल हो जाता है। अभ्यर्थी अगर मजबूत ग्रिप से पेन पकड़ता है तो पेन एक ही जगह पर रुक जाता है। अगर किसी तरह लिख लिया तो हाथ में तेज दर्द होने लगता है। देखने में व्यक्ति का हाथ सामान्य लगता है लेकिन लिखते वक्त ये सारी दिक्कतें आती हैं। दवाओं और व्यायाम से इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को थोड़ा ठीक किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से उसके ठीक होने की उम्मीद कम होती है।

 

 

 

Courtsyamarujala.com

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