मोबाइल फोन की लत महिलाओं में मोटापा बढ़ा रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के जंतु विज्ञान विभाग के एक हालिया शोध में पता चला है कि रात 11 बजे के बाद मोबाइल फोन पर सक्रिय महिलाओं में 15 फीसदी तक मोटापा बढ़ा है।
मोबाइल फोन की लत महिलाओं में मोटापा बढ़ा रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के जंतु विज्ञान विभाग के एक हालिया शोध में पता चला है कि रात 11 बजे के बाद मोबाइल फोन पर सक्रिय महिलाओं में 15 फीसदी तक मोटापा बढ़ा है। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की ओर से वर्ष 2024 मे यंग एसोसिएट राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डॉ.गौरव मजुमदार और उनकी टीम की ओर से 35 महिलाओं पर रैंडम आधार पर किए गए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि यह आदत महिलाओं में पॉलिसिटिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), मोटापा और मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
डॉ.गौरव यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूनाइटेड किंगडम में रिसर्च एसोसिएट के रूप में इस शोध पर काम कर चुके हैं। अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग से बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर जुड़कर अपना शोध भारतीय महिलाओं पर अध्ययन के साथ आगे बढ़ाया है। इसकी शुरुआत उन्होंने उत्तर प्रदेश की महिलाओं से की है। डॉ.गौरव बताते हैं कि आज की भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी में हम सूरज की रोशनी से ज्यादा मोबाइल फोन और लैपटॉप की कृत्रिम रोशनी के बीच समय बिता रहे हैं। यह बदलाव केवल नींद की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के सर्केडियन रिदम को भी प्रभावित कर रहा है। इससे दूसरी तरह की बीमारियां भी जन्म ले रही हैं।
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क्या है ‘सर्कैडियन रिदम’ और क्यों है यह जरूरी
हमारे शरीर के अंदर एक प्राकृतिक घड़ी होती, जो लगभग 24 घंटे के चक्र में काम करती है। यह घड़ी तय करती है कि कब हमें नींद आनी चाहिए, कब भूख लगनी चाहिए और शरीर को कब कौन सा हार्मोन रिलीज करना है। इसी को सर्कैडियन रिदम की संज्ञा दी गई है। डॉ.गौरव के अनुसार शरीर में मेलाटोनिन नामक एक नाइट हार्मोन होता है, जो केवल अंधेरे में बनता है। रात में मोबाइल फोन की नीली रोशनी या टीवी चालू रखने से इस हार्मोन का बनना रुक जाता है, जिससे शरीर की पूरी लय बिगड़ जाती है और महिलाएं पीसीओएस, मोटापे व तनाव का शिकार हो जाती हैं।
क्या खाने से ज्यादा जरूरी है कब खाना
इस शोध का एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि वजन बढ़ने का संबंध केवल आपके भोजन में मौजूद कैलोरी से नहीं, बल्कि आपके भोजन ग्रहण करने के समय से भी है। डॉ.गौरव बताते हैं कि रात 11 बजे के बाद भोजन करने या मोबाइल का अधिक उपयोग करने से महिलाओं में शरीर की चर्बी 15 फीसदी तक बढ़ जाती है।
मेडिकल कॉलेज की जांच ने शोध पर लगाई मुहर
इस शोध में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय जांच में यह पाया गया कि मोबाइल की लत महिलाओं के लिए हानिकारक साबित हो रही है। उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से वित्तपोषित इस प्रोजेक्ट में डॉ.गौरव मजुमदार के साथ इविवि के जंतु विज्ञान विभाग की ही गरिमा गुप्ता (रिसर्च असिस्टेंट), मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रो.बीनू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रो. एसआई रिजवी और डॉ.गरिमा यादव की संयुक्त टीम काम कर रही है।
बच्चों में डिजिटल नशा उतारना है तो आजमाएं फॉर्मूला-15
बच्चे डिजिटल नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बचाने में ‘फॉर्मूला-15’ बेहद कारगर साबित हो रहा है। इस प्रक्रिया को रेड्यूज इंटरनेट एडिशन भी कहा जाता है। इसमें इंटरनेट की लत को कम करने के लिए डिजिटल डिटॉक्स, स्क्रीन टाइम सीमित करने और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
आमतौर पर जो बच्चे दिन में अधिक समय मोबाइल, कंप्यूटर, टीबी, टैब व लैपटॉप पर देते हैं। उन्हें अचानक से डिजिटल दुनिया से दूर करना खतरनाक हो सकता है। इस दौरान बच्चे चिड़चिड़े, गुस्सैल हो सकते हैं। इसी को देखते हुए मनोरोग विशेषज्ञों ने ‘फॉर्मूला-15’ तैयार किया।
इस फॉर्मूला के तहत बच्चे के फोन पर 15-15 मिनट का टाइमर सेट किया जाता है। हर 15 मिनट फोन चलाने के बाद टाइमर सिग्नल देने लगता है। जिसका मतलब है कि बच्चे कुछ देर फोन बंद करके अन्य गतिविधि करें। ऐसे में बच्चा जितनी बार फोन का इस्तेमाल करता है उसे टाइमर लगाना होता है। इस फॉर्मूले से बच्चे डिजिटल दुनिया से दूर होते हैं। वहीं, जो बच्चे 10 वर्ष से कम हैं, उनके माता-पिता को गतिविधि करानी होगी।
बोले डॉक्टर
‘फॉर्मूला-15’ काफी उपयोगी है। अब तक कई बच्चे डिजिटल नशे से दूर हुए हैं। यह धीरे-धीरे की जाने वाली प्रक्रिया है। इसके परिणाम में तीन से चार हफ्ते का समय लग सकता है। -डॉ. पंकज कौटार्य, मनोवैज्ञानिक, कॉल्विन हॉस्पिटल।
कैसे कम करें मोबाइल की लत
1-फोन पर 15-15 मिनट का टाइमर सेट करें।
2- नोटिफिकेशन आने पर फोन से हटकर अन्य एक्टिविटी करें।
3-15 मिनट के ब्रेक में खेलें-कूदें, होम वर्क या अन्य काम करें।
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