किशोर और युवा डिजिटल नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। प्रयागराज में एक युवती मोबाइल फोन छीनने पर खुद को चुड़ैल कहने लगी। साथ ही वैसा ही व्यवहार करने लगी।
मोबाइल फोन की लत युवाओं में मानसिक समस्या पैदा कर रही है। मनौरी की रहने वाली एक युवती (19) की दिन-रात मोबाइल देखने की आदत से नाराज भाई ने एक दिन अचानक उसका फोन छीन लिया। इसके बाद वह अपने बाल खोलकर अजीब हरकतें करने लगी। खुद को चुड़ैल कहकर डरावनी आवाजें निकलने लगी।
ओझा-तांत्रिक के पास से होते परिजन उसे मुंडेरा स्थित एक निजी चिकित्सालय लेकर पहुंचे तो पता चला यह सब मोबाइल छीनने का नतीजा है। डॉक्टर के अनुसार मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से युवती को डिसोसिएटिव डिसऑर्डर या सिजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी हो गई है। इससे ग्रसित मरीज अजीब आवाजें, हिंसक व्यवहार करने लगते हैं। कभी-कभी बेहोश भी हो जाते हैं। लोग इसे चुड़ैल या भूत भी कहने लगते हैं।
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अचानक पाबंदी के नुकसान
1-जिद्दी, हिंसक या अत्यधिक बेचैन हो सकती हैं।
2-स्क्रीन पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से मस्तिष्क का वास्तविक दुनिया से संपर्क अस्थायी रूप से टूट सकता है, जिसे डिजिटल डिसोसिएशन या फ्लो स्टेट कहते हैं।
3-लत के कारण मोबाइल न मिलने पर गहरा मानसिक तनाव पैदा हो सकता है, जो बाद में अवसाद में बदल सकता है।
4-स्क्रीन की नीली रोशनी के कारण नींद में कमी, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
5-बच्चों का परिवार और वास्तविक दुनिया से संपर्क कम हो जाता है, वह अपनी काल्पनिक दुनिया में ही रहने लगते हैं।
धीरे-धीरे छुड़ाएं आदत
1-अचानक मोबाइल न छीनें, धीरे-धीरे समय कम करें।
2-समय सीमा तय करें, स्क्रीन टाइम को सीमित करें।
3-शारीरिक खेल-कूद और परिवार के साथ समय बिताने को प्रेरित करें।
बच्चे, किशोर व युवाओं के मस्तिष्क व व्यवहार पर अधिक मोबाइल चलाने का दुष्प्रभाव पड़ रहा है। वह अलग दुनिया में जीने लगते हैं। परिजनों को उन्हें समय देना चाहिए। शारीरिक श्रम जैसे आउट डोर गेम में लाना जरूरी है। हमारे यहां इस प्रकार के काफी केस देखने को मिल रहे हैं।- डॉ. राजीव सिंह, लैप्रोस्कोपिक सर्जन
मोबाइल अचानक छीनने के बाद होने वाली समस्या मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर में असंतुलन या अत्यधिक तनाव का परिणाम है। इसके लिए मनोचिकित्सक से इलाज अनिवार्य है। किसी अंधविश्वास में न पड़ें।
* डॉ. वीके सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल
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