Monday, February 16, 2026
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NCR Railway : 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत, एनसीआर रेलवे ने किया कवच प्रणाली का ट्रायल

उत्तर मध्य रेलवे ने रेल संरक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रयागराज मंडल के दादरी-टुंडला खंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का 160 किमी प्रति घंटे की उच्च गति पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। 14 फरवरी 2026 को इस परीक्षण शृंखला का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।

उत्तर मध्य रेलवे ने रेल संरक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रयागराज मंडल के दादरी-टुंडला खंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का 160 किमी प्रति घंटे की उच्च गति पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। 14 फरवरी 2026 को इस परीक्षण शृंखला का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ, जिसमें 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस रेक के साथ उच्च गति परिचालन स्थितियों में प्रणाली के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। परीक्षण के दौरान 160 किमी प्रति घंटा की गति पर ‘कवच’ के गति पर्यवेक्षण और स्वचालित ब्रेकिंग हस्तक्षेप का सटीक परिणाम प्राप्त हुआ।

वंदे भारत के साथ सफल परीक्षण के बाद, अब पारंपरिक कोच संयोजनों के साथ इस प्रणाली को परखा जाएगा। आगामी 16, 17 और 18 फरवरी को WAP-5 और WAP-7 विद्युत इंजनों के साथ विस्तृत परीक्षण किए जाने की योजना है।। यह परीक्षण इतालवी सुरक्षा मूल्यांकन संस्था की देखरेख में स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे हैं। परीक्षणों के दौरान निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

कुलवा लूप लाइन गति नियंत्रण परीक्षण: स्टेशन की लूप लाइन पर प्रवेश करते समय ट्रेन की गति को सुरक्षित सीमा के भीतर स्वतः नियंत्रित करना।

एसपीएडी रोकथाम: ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ (सिग्नल तोड़ना) जैसी घटनाओं को रोकने की प्रभावशीलता का सत्यापन।
विफलता परिदृश्य: स्टेशन-से-स्टेशन एवं लोको संचार विफलता और आर एफ आई दी टैग की अनुपस्थिति जैसी कठिन परिस्थितियों में सिस्टम की प्रतिक्रिया।

ऑटो-व्हिसलिंग: समपार फाटकों पर स्वचालित रूप से सीटी बजाने की सुविधा का परीक्षण।

इन व्यापक परीक्षणों का उद्देश्य प्रणाली के पूर्ण कार्यान्वयन से पूर्व संरक्षा के उच्चतम वैश्विक मानकों को सुनिश्चित करना है। सभी आवश्यक स्वीकृतियों और परीक्षणों के सफल समापन के बाद, इस खंड पर ‘कवच’ युक्त ट्रेनों का नियमित परिचालन यथाशीघ्र प्रारंभ कर दिया जाएगा।

यह तकनीक न केवल मानवीय भूलों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकेगी, बल्कि घने कोहरे और खराब मौसम में भी ट्रेनों के सुरक्षित एवं समयबद्ध संचालन में मील का पत्थर साबित होगी।

 

 

Courtsyamarujala.com

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