महाकुंभ-2025 मेले के दाैरान किन्नर अखाड़े का विस्तार होगा। इस बार किन्नरों ने पांच शिविर लगाने की तैयारी की है। इसके लिए मेला प्राधिकरण से जमीन मांगी है। शिविर बढ़ने के साथ ही अब इनकी संख्या 250 से 300 हो गई है। किन्नर अमूमन संत-महात्माओं से दूर ही रहते थे। शुरुआत में किन्नरों का अखाड़ा परिषद ने विरोध भी किया था। धीरे-धीरे विरोध शांत हुआ और किन्नर अखाड़ा का विस्तार होने लगा है। पहली बार 2016 के उज्जैन कुंभ मेले के दाैरान लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी।
महाकुंभ 2025: किन्नर अखाड़े का होगा भव्य विस्तार, पांच नए शिविरों के लिए मेला प्राधिकरण से जमीन की मांग
महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने किन्नर अखाड़ा बनाया। अखाड़ा बनने के बाद किन्नर जुड़ने लगे। वर्ष 2017 के माघ मेले में उन्होंने पहली बार प्रयागराज में शिविर लगाया। उस समय उनके साथ 40-50 किन्नर ही थे। उसके बाद से वह लगातार माघ मेले में शिविर लगाने लगे। कुंभ-2019 के दाैरान किन्नर अखाड़ा का जूना समझाैता हो गया। दोनों एक दूसरे के कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगे, लेकिन कुछ अखाड़े इसके विरोध में थे। कुंभ के दाैरान किन्नर अखाड़ा की स्वीकार्यता बढ़ी। किन्नरों ने शहर में भव्य रोड शो निकाला था। उनके शिविर में भक्तों की भीड़ उमड़ने थी।
इसी बीच महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने देशभर के कई किन्नरों को महामंडलेश्वर बना दिया। उत्तर प्रदेश किन्नर वेलफेयर बोर्ड का गठन किया गया। उसमें किन्नर अखाड़ा की प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि टीना मां को सदस्य बनाया गया। उन्होंने वर्ष 2023 के माघ मेले में अलग से शिविर लगाया था।
पहले की तरह किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का शिविर रहेगा। इनके अतिरिक्त किन्नर कल्याण परिषद की महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नाथ गिरि, पशुपतिनाथ पीठाधीश्वर व कथावाचक महामंडलेश्वर स्वामी हिमांगी सखी मां का अलग शिविर रहेगा। यह निर्मोही अखाड़ा से भी जुड़ी हुई हैं। महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणीनंद गिरि छोटी मां और एक अन्य ने भी शिविर के लिए जमीन की मांग की है।
Courtsy amarujala.com
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