बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत भरी खबर है। गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की बुलेटिन के अनुसार बृहस्पतिवार को भी गंगा के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। अब यहां पर फाफामऊ में गंगा 83.64 मीटर पर बह रही हैं। छतनाग में जलस्तर 82.32 मीटर पर बह रही हैं। इसी तरह यमुना का जलस्तर भी घट रहा है। नैनी में फिलहाल जलस्तर 82.96 मीटर पर है। जनपद से गुजरने वाली ससुर खदेरी, मनसैता, टोंस, बेलन, गोरमा, लापरी, टुडियारी आदि नदियां भी उफान पर हैं। जिससे इनके किनारे के रिहायशी इलाकों में खलबली मची है। घरों में पानी भर गया है और खेतों में फसलों के ऊपर से पानी बह रहा है। सर्वाधिक नुकसान सब्जियों की खेती को हुई है। तराई इलाकों में बोई गई नेनुआ, भिंडी, तरोई, लौकी, कद्दू, खीरा, करैला आदि सब्जियों के साथ मकई, ज्वार, तिल्ली आदि फसलें बाढ़ से बर्बाद हो गई हैं।
जिले में 11 घंटे में 42 मिमी तो शहर में 60 मिमी हुई बारिश
जिले में मंगलवार को 11 घंटे में 42.31 मिलीमीटर बारिश हुई। इनमें से करछना और कोरांव के बाद शहर में सबसे अधिक सदर तहसील में 60 मिमी बारिश हुई। प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह आठ से शाम सात बजे के बीच करछना में 72 मिमी बारिश हुई। कोरांव में 62 मिमी और सदर तहसील में 60 मिमी बारिश हुई। बारा में 33, हंडिया में 23.5, फूलपुर में 10 तथा सोरांव में 15 मिमी बारिश हुई।
गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद सहायक नदियां चंबल, केन और बेतवा भी उफान पर थी। कई जिलों से होते हुए प्रयागराज में पानी पहुंचा तो वह बाढ़ का रूप ले लिया था। यमुना के सापेक्ष शुक्रवार को गंगा का पानी धीमी गति से बढ़ा था। यमुना का वेग इतना तेज था कि रात तक लेटे हनुमानजी डूब गए। सुबह तक मंदिर परिसर में कमर तक पानी भर गया था।
यमुना का वेग इतना तेज था कि रात तक लेटे हनुमानजी डूब गए। सुबह तक मंदिर परिसर में कमर तक पानी भर गया था।
बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। नदियां उफान पर हैं तो करीब एक मीटर की गिरावट के बाद जलस्तर फिर स्थिर हो गया है। यानी, गिरावट थम गई है। इससे बाढ़ में फंसे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रशासन ने भी घर जाने के लिए तैयार लोगों को राहत शिविरों में रोक लिया है।
गंगा और यमुना का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार करने के बाद खतरे के निशान के करीब पहुंच गया था। इससे बड़ा इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। बघाड़ा, सलोरी, बेली कछार, राजापुर, गंगानगर, नेवादा समेत अनेक मोहल्लों के हजारों मकान डूब गए हैं। इस वजह से बड़ी संख्या में लोगों को घर छोड़कर अपने रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ा था। 395 परिवार के 1696 लोग तो प्रशासन की ओर से बनाए राहत शिविरों में पहुंचे हैं।
बाढ़ का खतरा तो बना हुआ है लेकिन सोमवार दोपहर से जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की जाने लगी थी। लेकिन बुधवार शाम को जलस्तर में गिरावट फिर थम गई। हालांकि, बढ़ोतरी भी दर्ज नहीं की गई। बताया जा रहा है कि गंगा और यमुना की सहायक नदियों में पानी तेजी से आ रहा है। इसके अलावा पहाड़ों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज बारिश का क्रम जारी है।
इससे नदियों के जलस्तर में गिरावट रुक गई है। इसी के साथ इसमें एक बार फिर बढ़ोतरी की आशंका बन गई है। इसके अलावा नदियों में बहाव भी काफी तेज है। इससे बाढ़ में फंसे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। साथ ही परेशानी लंबी खिंचती दिख रही है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विनय कुमार सिंह ने बताया दो दिनाें में पानी एक मीटर से ज्यादा नीचे आ गया था। पानी छोड़े जाने की अभी सूचना नहीं है। बारिश एवं सहायक नदियों का ही पानी आ रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि दो-तीन दिनों में पानी निकल जाएगा।
सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार फाफामऊ में गंगा 84.07 मीटर, छतनाग में में 83.40 मीटर पर बह रही हैं। इसी तरह यमुना का जलस्तर नैनी में 83.90 मीटर रिकॉर्ड किया गया। 24 घंटे में गंगा में 21 और यमुना में 39 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। डेंजर लेबल 84.734 मीटर है। गंगा और यमुना खतरे के निशान के बिल्कुल करीब पहुंच गई हैं और कभी भी निशान को पार कर सकती हैं।
ऋषिकुल में वितरित की गई राहत किट
राजापुर के बाढ़ पीड़ितों के लिए ऋषिकुल विद्यालय में बने राहत शिविर में बुधवार को राशन किट का वितरण किया गया। जलस्तर में कमी के बाद कई लोगों के मकान से पानी निकल गया है। ऐसे परिवार अपने घर जाने लगे। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से ऋषिकुल में राहत किट का वितरण किया गया। विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने 62 बाढ़ पीड़ितों को राशन किट वितरित किए। किट में 10 किग्रा चावल, 10 किग्रा आटा, 10 किग्रा आलू, दो किग्रा अरहर की दाल, एक लीटर तेल, हल्दी, मसाला, नमक, मिर्च, लाई, भुना चना, तिरपाल, माचिस, मोमबत्ती, गुड, बिस्किट, साबुन आदि सामग्री रखे गए हैं। इस मौके पर एसडीएम सदर अभिषेक ने शिविरों में लोगों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों के अलावा बाढ़ में फंसे लोगों को तक भी नाव से खाने के पैकेट पहुंचाए गए। इस दौरान पार्षद भोला तिवारी, कमलेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर किया राहत सामग्री का वितरण
भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक डा. एलएस ओझा ने बुधवार को सिविल डिफेंस के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच जाकर राहत सामग्री का वितरण किया। छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि इलाकों में वह गए। इस दौरान एनी बेसेंट स्कूल में बने राहत शिविर में भी मेडिकल कैंप भी लगाया। वहां उन्होंने डा. शशांक ओझा के साथ शिविर में बीमार लोगों को उचित परामर्श देने के साथ ही दवा का भी वितरण किया। डा. ओझा ने दूध, ब्रेड, लाई चना एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं बाढ़ पीड़ितों को मुहैया कराई। इस अवसर पर राम प्रभाकर शुक्ला, यादवेंद्र मिश्रा, बलियान त्रिपाठी, बबलू पांडेय, ज्ञानेश्वर शर्मा, सुनीता शर्मा, वंदना उपाध्याय आदि की मौजूदगी रही।
बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का होगा सर्वे, मिलेगा मुआवजा
बाढ़ की वजह से फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। गंगापार में सब्जी की बड़े पैमाने पर खेती होती है लेकिन बाढ़ की चपेट में आने से पूरी फसल चौपट हो गई है। इसके अलावा फूलपुर, हंडिया, करछना में अन्य फसलों को भी काफी नुकसान हुआ। इस नुकसान का किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। इस बाबत नुकसान का सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व विनय कुमार सिंह ने बताया कि सर्वे का आदेश दिया गया है। बाढ़ का पानी निकलने के बाद राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम नुकसान का सर्वे करेगी। उस आधार पर किसानों को नुकसान की भरपाई की जाएगी।
जलस्तर में कमी के बावजूद बढ़ गए दो परिवार
जलस्तर में कमी की वजह से सैकड़ाें घरों से बाढ़ का पानी निकल गया है। ऐसे परिवार घर जाने की तैयारी में है। इसके विपरीत दो परिवार बुधवार को भी राहत शिविर में आए। दोनों ही परिवार से एक-एक सदस्य स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज में आए। अन्य शिविरों में न तो संख्या बढ़ी और न ही कोई वापस हुआ। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब काफी छानबीन के बाद ही लोगों को शिविरों में प्रवेश दिया जा रहा है। चूंकि, शिविर में आए परिवारों को वापसी पर राशन किट वितरित की जाएगी। इसके लिए भी लोगों के शिविर में आने की शिकायत हुई है। इसे देखते हुए सख्ती बरती जा रही है।
शिविरों में बढ़ने लगे मरीज
राहत शिविरों में चार-पांच दिनों से फंसे लोगों को अब बीमारी का भी खतरा मंडराने लगा है। त्वचा के अलावा बुखार, सर्दी की शिकायत भी बढ़ने लगी है। महबूब अली इंटर कॉलेज तथा एनी बेसेंट स्कूल में ही 50 से अधिक लोगों की तबीयत खराब हो गई है। इसे देखते हुए चिकित्सकों की दो टीम भी अलग-अलग समय पर बैठने लगी है।
खोखली हुई जमीन, गिरे पेड़
मंगलवार को हुई बारिश की वजह से कई पेड़ भी गिर गए थे। यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। सुबह भी दो बड़े पेड़ गिर गए। सड़क चौड़ीकरण तथा अन्य निर्माण कार्यों की वजह से जमीन की पकड़ ढीली पड़ गई है। ऐसे में लगातार बारिश से पेड़ गिरने की शिकायत बढ़ गई है। बुधवार की सुबह बारिश तो नहीं हुई लेकिन फायर ब्रिगेड चौराहा तथा परेड मैदान में नीम के पेड़ गिर गए। इसकी वजह से फायर ब्रिगेड चौराहे पर आवागमन भी रुक गया। नगर निगम की टीम ने पेड़ हटवाया। इसके बाद आवागमन सुचारू हो सका।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।