
पुलिस ने विशाल, अजीत, सुरेंद्र, रोहित, शिवम, रवि, अमित को गंभीर हालत में जिला अस्पताल व रनियां के अस्पतालों में भर्ती कराया। इसी बीच आग भड़क गई और गोदाम का टिनशेड दीवारों के साथ ढह गया। इससे अंदर फंसे मनोज, लवकुश, प्रांशु को बाहर नहीं निकाला जा सका।

जिलाधिकारी आलोक सिंह, एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति, एडीएम प्रशासन अमित कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व केशवनाथ गुप्ता, एएसपी राजेश पांडेय, सीओ तनु उपाध्याय समेत, स्वास्थ्य, एनएचएआई व एसडीआरएफ की टीम पहुंची। सुबह नौ बजे से लेकर शाम चार बजे तक मलबा हटाया गया। शाम चार बजे मौके से तीन जिंदा जले शव (कंकाल) मिले। बताया जा रहा है कि यह अंदर फंसे मजदूरों के शव हैं। हालांकि शवों की पहचान नहीं हो सकी है। डीएनए टेस्ट से इनकी पहचान कराई जाएगी।

गैस रिसाव और स्पार्किंग बताई जा रही मुख्य वजह
आग लगने की वजह गैस रिसाव और स्पार्किंग बताई जा रही है। इधर, शाम पांच बजे के करीब गंभीर हालत में रेफर किए गए अमित पुत्र लालता प्रसाद निवासी अंतापुर बराैर की कानपुर के हैलट में मौत हो गई। फैक्टरी गेट के बाहर परिजन शव दिखाने व अंदर जाने को लेकर हंगामा करते रहे। मृतकों के परिजनों का बुरा हाल रहा। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी उन्हें ढांढस बंधाते रहे। आरपी पॉलीपैक फैक्टरी की फायर अनापत्ति नहीं थी। करीब डेढ़ साल पहले अस्थायी अनापत्ति के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार आवेदन नहीं होने पर अनापत्ति देने से मना कर दिया गया था। शनिवार को आग लगने की घटना की सूचना पर फैक्टरी परिसर देखा गया। अग्निसुरक्षा इंतजाम नहीं मिले। हाइडेंट लाइन बनी मिली। टैंक से पानी पंप करने के लिए कोई मोटर नहीं लगा है। साफ है कि अग्नि सुरक्षा के इंतजाम सक्रिय नहीं मिले। – सुरेंद्र सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

फैक्टरी में लगी आग के मामले की जांच कराई जाएगी। किस स्तर पर लापरवाही रही इसका पता लगाया जा रहा है। फैक्टरी प्रबंधन पीड़ितों की मदद कर रहा है। प्रशासन स्तर पर नियमानुसार मदद की जाएगी। – आलोक सिंह, जिलाधिकारी

गोदाम में आग लगने की जानकारी मिलते ही पुलिस व प्रशासन की टीम पहुंच गई थी। राहत बचाव कार्य करते हुए सात घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इसमें एक की कानपुर में मौत हुई है, जबकि तीन के शव मिले हैं। शवों की पहचान कराई जा रही है। मामले की जांच की जा रही है। – बीबीजीटीएस मूर्ति एसपी

फैक्टरी के बाहर रोके जाने पर परिजनों ने किया हंगामा
फोम फैक्टरी में आग लगने व परिवार के सदस्यों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही महिलाएं, बच्चे व गांव के लोग काफी संख्या में गेट के बाहर जा पहुंचे।काफी देर तक परिवार के लोग घटना के बारे में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों से जानकारी लेते रहे। जैसे ही उन्हें जानकारी हुई कि संजय नाम का मरीज सुरक्षित है, शेष सात को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि तीन अंदर फंसे हैं। इस पर परिवार अपनों का हाल जानने के लिए बेताब होने लगे। महिलाएं अंदर स्थिति दिखाने की बात पर अड़ गईं।

सीओ ने मोर्चा संभाला, तब महिलाएं हुईं शांत
एएसपी राजेश पांडेय, सीओ तनु उपाध्याय के साथ गेट पर तैनात पुलिस कर्मी उन्हें समझा रहे थे। इतने में कुछ महिलाएं व युवक उग्र हो हंगामा करने लगा। पुलिस कर्मियों से हाथापाई पर उतारू हो गए। इस पर महिलाओं को समझाने के लिए सीओ ने मोर्चा संभाला तो महिलाएं शांत हुई। इसके बाद मनोज, लवकुश, प्रांशू के परिजनों को बारी बारी से अंदर भेज स्थिति दिखा कर ढांढस बंधाया। इधर देर शाम तक सैकड़ों की संख्या में परिजन, ग्रामीण गेट के बाहर डंटे रहे।







