भारतीय सिनेमा के गीत-संगीत ने लोगों पर अमिट छाप छोड़ी है। यह भारतीय सिनेमा की ताकत है कि उसने परंपरागत गीत और संगीत को समाहित करते हुए लोगों को अपने रंग में रंगा है। फिल्म लोगों को भले ही याद न हो, लेकिन वो गीत गुनगुनाना नहीं भूलते हैं। प्रयागराज संगीत क्लब की ओर से एनसीजेडसीसी में रविवार को आयोजित होने वाले संगीत समारोह में हिस्सा लेने के लिए आए संगीतकारों ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में उक्त विचार रखे। उन्होंने कहा कि टैलेंट और कंटेंट में कमी न होने के बावजूद आज के दौर में नया संगीत काफी कम बन रहा है।
आज उसी को रिक्रेयेट किया जा रहा है। झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में उन्हीं की रचना है, जो आज लोगों की जुबान पर है। फिल्म वीर जारा, अनुराग कश्यप की फिल्म साहब बीवी गैंगस्टर, लग जा गले के गाने में वही संगीत दिख रहा है। रामचंद्र ने राक एंड रोल, आना मेरी जान संडे के संडे आदि में हिंग्लिश का खूब प्रयोग किया।
जाने माने फिल्म इतिहासकार पवन झा ने कहा कि आज संगीत क्रियेट नहीं सिर्फ प्रोड्यूस किया जा रहा है। नए गीतकार प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह नाकाफी है। आज फिल्में तो खूब बन रही हैं लेकिन उस हिसाब से अच्छे गीत और संगीत नहीं निकल रहे हैं।
Courtsy amarujala.com



