Saturday, February 21, 2026
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Mahakumbh : अखाड़ों में दो सौ से अधिक खालसे बढ़े, नए महामंडलेश्वरों-महंतों में इजाफा

भूमि कम होने से अखाड़ों के संतों में आक्रोश है। अखाड़ों की सबसे बड़ी चिंता ने खालसों, महंतों और महांडलेश्वरों को लेकर है। कहा जा रहा है कि जब पहले से मिलने वाली भूमि -सुविधा में कमी की जा रही है, तब नए खालसों को कहां और कैसे बसाया जाएगा।

महाकुंभ में विश्व समुदाय के बीच सबसे बड़े आकर्षण के रूप में नजर आने वाले अखाड़ों के संत और नागा संन्यासी इस बार भूमि घटने से गुस्से में हैं। बृहस्पतिवार को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने मेला प्रशासन की ओर से जारी किए गए नक्शे का वर्ष 2019 के आवंटन से मिलान कराने के बाद ही भूमि आवंटन कराने का निर्णय लिया। अखाड़ा परिषद का कहना है कि जब तक सभी 13 अखाड़ों को मिलने वाली भूमि-सुविधाओं में 25 प्रतिशत की वृद्धि की प्रशासन घोषणा नहीं करेगा, तबतक अखाड़े आवंटन के लिए नहीं जाएंगे।

भूमि कम होने से अखाड़ों के संतों में आक्रोश है। अखाड़ों की सबसे बड़ी चिंता ने खालसों, महंतों और महांडलेश्वरों को लेकर है। कहा जा रहा है कि जब पहले से मिलने वाली भूमि -सुविधा में कमी की जा रही है, तब नए खालसों को कहां और कैसे बसाया जाएगा। बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद् पुरी ने बताया कि वर्ष 2019 के मानचित्र से मौजूदा नक्शे का मिलान कराया जा रहा है। इसमें अनुभवी संतों की मदद ली जा रही है। ताकि, भूमि घटने की वजहों को जाना जा सके। अखाड़े के प्रतिनिधियों का कहना है कि आखिर उनकी भूमि चली कहां गई, इसकी पैमाइश और जांच कराई जानी चाहिए, ताकि असलियत सामने आ सके।

25 प्रतिशत भूमि बढ़ाकर देने की मांग

कहा जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों में जहां नए महंतों, महामंडलेश्वरों और खालसों की संख्या बढ़ गई है, वहीं भूमि कम हो जाने से बसावट को लेकर बड़ा संकट पैदा होने की आशंका है। जूना अखाड़े में ही तीन सौ से अधिक महामंडलेश्वर और महंतों का पट्टाभिषेक होने वाला है। इसी तरह सभी अखाड़ों में महंतों, महामंडलेश्वरों और खालसों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे नए महामंडलेश्वरों और महंतों के आवेदन भी अखाड़ों में आ रहे हैं। ऐसे में भूमि सुविधाओं में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। जब तक 25 प्रतिशत भूमि बढ़ाकर नहीं दी जाएगी, तब तक मेले में अखाड़ों के प्रतिनिधि भूमि आवंटन के लिए कदम नहीं रखेंगे।

भूमि कम होने के बाद सभी अखाड़ों में नाराजगी है। सवाल है कि जब पिछले कुंभ की तुलना में इस बार मेले का विस्तार किया गया है। भूमि का रकबा भी बढ़ाया गया है, तब अखाड़ों की भूमि कैसे कम पड़ रही है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुद नजर रखनी चाहिए।  – महंत दुर्गा दास, प्रवक्ता- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।

 

 

 

Courtsy amarujala.com

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