प्रयागराज। द प्रपोज़ल एक एकांकी नाटक है। जो कि 1888- 89 में एंटोन चेखव द्वारा लिखा गया एक प्रहसन है। यह नाटक परिवारों में विवाह संबंध बनाने की प्रवृत्ति के बारे में है। जिसका असली उद्देश्य अपनी संपत्ति और ज़मीन- जायदाद का विस्तार करना होता है। श्रीधर एक बड़ा युवा व्यापारी है जो कि एक धनी परिवार से सम्बन्ध रखता है। श्रीधर के पड़ोसी चौहान साहब भी एक बड़े किसान है और वह भी धनी परिवार से संबंध रखते हैं। श्रीधर चौहान साहब की पच्चीस वर्षीय बेटी निशा से शादी करना चाहता है, जिसके लिए वह विवाह का प्रस्ताव लेकर चौहान साहब के घर जाता है। श्रीधर, चौहान साहब और निशा तीनों ही झगड़ालू प्रवृत्ति के हैं। वे छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते हैं। वो कभी ज़मीन के एक खास टुकड़े के लिए झगड़ते हैं तो कभी अपने कुत्तों को लेकर भी झगड़ने लगते हैं। आपस में झगड़ने के बीच वे असली मुद्दे को पूरी तरह भूल जाते हैं जो कि विवाह का प्रस्ताव होता है। लेकिन अंत में प्रेम और समझदारी की ही जीत होती है। आर्थिक समझदारी सुनिश्चित करती है कि प्रस्ताव रखा जाए और प्रेम मन की कड़वाहट को ख़तम करता है। चौहान साहब इस अवसर को खोना नहीं चाहते वह अपनी बेटी का हाथ श्रीधर के हाथों में दे देते हैं। हालाँकि, पुरानी आदतें कभी नहीं जातीं, नवविवाहित जोड़ा अपने विवाहित जीवन की शुरुआत एक नए झगड़े के साथ करता है।

यह नाटक परिवार को एकजुटता का भी सन्देश देता है कि हमें पुरानी बातों को भूल कर नए रिश्तों को स्थान देना चाहिए, नफ़रत और द्वेष मिटा कर प्रेम को जीवन का आधार बनाना चाहिए।
मंच पर
चौहान साहब- राहुल चावला
निशा- शालिनी मिश्रा
श्रीधर – शिवम प्रताप सिंह
मंच परे
आलेख – एंटोन चेखव
प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन -निखिलेश कुमार मौर्य
रूप सज्जा – स्वाति चावला
वेशभूषा- प्रत्यूष वर्सने ( रिशु )
ध्वनि संचालन – सिद्धार्थ पाल
परिकल्पना एवं निर्देशन -राहुल चावला
Anveshi India Bureau



