प्रयागराज। भारतीय सनातन संस्कृति के अमर ग्रंथ महाभारत के वनपर्व पर आधारित संस्कृत नाटक ‘यक्ष–युधिष्ठिर संवाद’ का भावपूर्ण एवं प्रभावशाली मंचन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् तथा प्रोफेसर संगम लाल पाण्डेय मेमोरियल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में श्री सच्चा अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ।
नाटक के माध्यम से यह प्रेरक संदेश दिया गया कि धर्म ही जीवन का सर्वोच्च आधार है। धर्मनिष्ठा, सत्य और विवेक के पथ पर चलकर ही युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों का समाधान करते हैं और अपने सभी भ्राताओं को पुनः जीवन प्राप्त कराते हैं। यह संदेश मंचन के प्रत्येक दृश्य में अत्यंत प्रभावी रूप से अभिव्यक्त हुआ।
नाटक का सशक्त लेखन श्री श्रीकृष्ण त्रिपाठी (प्रधानाचार्य, श्री सच्चा अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय) द्वारा तथा कुशल निर्देशन श्री अमित पांडेय द्वारा किया गया। कलाकार अनुभव मिश्र, मनीष दुबे, नकुल, नितिन, शिवा आदि ने अपनी सजीव अभिनय क्षमता से पात्रों को जीवंत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

मुख्य अतिथि स्वामी चन्द्रदेव जी महाराज एवं स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज ने संयुक्त रूप से अपने उद्बोधन में कहा कि ‘यक्ष–युधिष्ठिर संवाद’ आज के समाज को धर्म, नैतिकता और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की अमूल्य शिक्षा देता है, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
इस अवसर पर श्रीमती गायत्री शुक्ल, डॉ. आनन्द प्रकाश पाण्डेय, डॉ. रमेश कुमार तिवारी, वेद प्रकाश तिवारी, डॉ. प्रसन्न घोष, उत्कर्ष श्रीवास्तव सहित अनेक विद्वानों को संस्कृत भाषा एवं साहित्य के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार में उनके अमूल्य योगदान के लिए “संस्कृत गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चन्द्रदेव जी महाराज, स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज, शिवाकांत तिवारी, वंदना मालवीया सहित अनेक साहित्यप्रेमी, विद्वान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन संस्कृत नाट्य परंपरा की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ।
Anveshi India Bureau



