Tuesday, February 17, 2026
spot_img
HomePrayagrajपुस्तक ‘काशी, नहीं जुलाहे की’ पर परिचर्चा आयोजित

पुस्तक ‘काशी, नहीं जुलाहे की’ पर परिचर्चा आयोजित

प्रयागराज। रुद्रादित्य प्रकाशन समूह, प्रयागराज द्वारा पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर के महत्वपूर्ण कवि एवं गीतकार यश मालवीय की पुस्तक ‘काशी, नहीं जुलाहे की’ पर विद्वानों ने अपने विचार रखे।

परिचर्चा के क्रम में सबसे पहले कवि श्रीरंग ने कहा कि यश मालवीय जैसे कवि अपनी रचनाओं में समय, समाज और संस्कृति को सहेजकर रखते हैं। उन्होंने कहा कि यश मालवीय साहित्य की नर्सरी से उभरे कवि हैं और जितना कवि रचना-प्रक्रिया में घिसता है, उसकी कविताओं में उतनी ही चमक आती है।

आलोचक एवं कवि रविनंदन सिंह ने कहा कि किसी भी पुस्तक को पढ़ने के लिए अनेक दृष्टिकोणों की आवश्यकता होती है। उन्होंने यश मालवीय को प्रतीकों की भाषा का सशक्त प्रयोग करने वाला गीतकार बताया, जिनके गीतों में नई शब्दावली का सार्थक प्रयोग दिखाई देता है।

कथाकार अनीता गोपेश ने कहा कि गीतों की एक लंबी परंपरा रही है, जो निराला से होती हुई आज तक चली आ रही है। यश मालवीय एक प्रतिभावान गीतकार हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा, बनावट और बुनावट है। उनकी कविताएं सामाजिक सरोकारों से गहरे जुड़ी हुई हैं और मध्यवर्गीय जीवन की बेचैनी, प्रेम, प्रकृति तथा मानव जीवन के साहचर्य को अभिव्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि यश मालवीय के गीतों में आज की हिंसा, विषमता और ढोंग तीखे तेवर के साथ सामने आते हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में ख्यातिलब्ध इतिहासकार प्रो. हेरम्ब चतुर्वेदी ने कहा कि यश मालवीय की कविताओं में ऐसा जीवन है, जो जीवन को जीना सिखाता है। उनकी कविताएं एक ओर दुष्यंत की परंपरा से जुड़ती हैं, तो दूसरी ओर कबीर की परंपरा से। उन्होंने कहा कि यश मालवीय के गीतों में सांगीतिक स्वर स्पष्ट रूप से उपस्थित है।

कार्यक्रम का संचालन युवा कवि प्रकर्ष मालवीय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिषेक ओझा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अमरजीत राम, सुधांशु, मनोज पांडे, डॉ. हर्ष मणि सिंह, डॉ. चंद्रपाल, कमल किशोर, सुशांत चट्टोपाध्याय सहित शहर के अनेक गणमान्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

 

Anveshi India Bureau

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments