सरकार ने खाद्य कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए फूड लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन के वार्षिक नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। 10 मार्च को जारी गजट के अनुसार अब एक बार लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन लेने के बाद उसे हर वर्ष नवीनीकृत कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
सिविल लाइंस उद्योग महिला व्यापार मंडल की अध्यक्ष एवं खाद्य कारोबारी स्वाती निरखी ने निर्णय का स्वागत करते हुए बताया कि पहले लाइसेंस का समय पर नवीनीकरण न होने पर वह निरस्त हो जाता था, जिससे व्यापारियों को पुनः जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नए प्रावधान से इस समस्या से राहत मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन की सीमा 12 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है। वहीं अब 50 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यापारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलेगा, जबकि इससे अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को केंद्र से लाइसेंस लेना होगा।
स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को भी राहत दी गई है। नगर निगम अथवा स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत पंजीकृत विक्रेताओं को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के अंतर्गत स्वतः पंजीकृत माना जाएगा, जिससे उन्हें अलग-अलग पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
व्यापारी नेता नीरज जायसवाल ने बताया कि यह प्रावधान अप्रैल 2026 से लागू होंगे। जिन लाइसेंसों की वैधता 31 मार्च 2026 तक है, उनका नवीनीकरण फिलहाल कराना होगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से व्यापारियों को बार-बार नवीनीकरण की प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और व्यापार करना आसान होगा।
Anveshi India Bureau



