इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समान आरोप में एक आरोपी को जमानत दे दी जबकि दूसरे आरोपी की जमानत क्यों खारिज कर दी। न्यायालय ने अपर सत्र न्यायाधीश विशेष जज पॉक्सो पडरौना कुशीनगर से इस मामले में सफाई मांगी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समान आरोप में एक आरोपी को जमानत दे दी जबकि दूसरे आरोपी की जमानत क्यों खारिज कर दी। न्यायालय ने अपर सत्र न्यायाधीश विशेष जज पॉक्सो पडरौना कुशीनगर से इस मामले में सफाई मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने मुकेश की जमानत अर्जी की सुनवाई पर दिया है।
पडरौना निवासी मुकेश और एक अन्य पर 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। नाबालिग ने आरोप लगाया था कि दोनों आरोपियों न उस पर केमिकल फेंका था, जिससे वह घायल हो गई। आरोपी मुकेश की जमानत विशेष अदालत ने 22 नवंबर 2024 को खारिज दिया। ऐसे में आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि नाबालिग के शरीर पर केमिकल से जलने के निशान हैं। उसने अपने बयान में दो व्यक्तियों पर केमिकल डालने का आरोप लगाया है। ट्रायल कोर्ट ने सह अभियुक्त सूरज राजभर को जमानत दे दी और याची की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस पर न्यायालय ने अपर सत्र न्यायाधीश से ऐसा आदेश करने के मामले में सफाई मांगी है। अर्जी पर अगली सुनवाई सात मार्च को होगी।
Courtsy amarujala.