प्रयागराज। हिंदी और उर्दू भाषा की एक साझा गोष्ठी वरिष्ठ कलाकार तलत महमूद के करैली स्थित आवास पर आयोजित की गई। गोष्ठी में नावेल निगार व पूर्व प्रधानाचार्य अहमद हसनैन रिज़वी ने अपनी कहानी _’एक फर्लांग लम्बी सड़क’_ सुनाया तो शायर और कवियों ने हिंदी और उर्दू में ख़ूबसूरत कलाम पेश किए।
महफ़िल की सदारत लेखक डॉ. रामलखन चौरसिया, मेहमान-ए-खुसूसी कलकत्ता से आए उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य ख़्वाजा अहमद हुसैन, विशिष्ट अतिथियों में नावेल निगार अहमद हसनैन रिज़वी एवं तश्ना कानपुरी रहे।
मेहमान-ए-खुसूसी ख़्वाजा अहमद हुसैन ने कहानी की जमकर तारीफ़ किया। कहा, ‘सड़क अपनी छाती पर चलने वालों से पूछती है कि वे इतने संगदिल क्यों हैं। उद्देश्य को प्रतीकात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।’
सदारत कर रहे डॉ रामलखन चौरसिया ने कहा कहानी भावपूर्ण है और यह आईने की तरह दो वर्गों की तस्वीर पेश करती है।
निज़ामत कर रहे तश्ना कानपुरी ने कहा ‘कहानी में किरदारों का बहुत अच्छे से जिक्र किया है और अपना ग़ज़ल सुना _’अज़्म से मेरे तुम न टकराओ, गर्म पानी से घर नहीं चलते’_ खूब वाहवाही लूटी।
शायर तलत महमूद (बटोही) ने कलाम _’यूं फ़ित्नों के तआक़ुब में रहना अच्छी बात नहीं, अगर हो आदमी तो आदमियत की बात करो’।_ की तारीफ हुई। सदारत कर रहे डॉ. राम लखन चौरसिया ने दोहा _’दाने दाने पर यहाँ बिछा हुआ है जाल, फंसे परिंदे फंद में, भूखा रहा सवाल।’_ पढ़ तालियां बटोरी। गोष्ठी में जफर अब्बास, अज़हर महमूद, अबुल हसन, अबजत हुसैन, व अहमद अरहम आदि मौजूद रहे।
Anveshi India Bureau



