प्रयागराज। इंटैक (INTACH) प्रयागराज चैप्टर द्वारा इलाहाबाद लॉ म्यूज़ियम एवं अभिलेखागार की एक विशेष क्यूरेटेड हेरिटेज ट्रेल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की कम जानी-पहचानी लेकिन अत्यंत समृद्ध विरासत के दर्शन किए।
सदस्यों ने इस अद्भुत संग्रहालय को देखकर गहरी अभिव्यक्ति दी, जिसमें मध्यकालीन ऐतिहासिक निर्णयों, न्यायिक परिधान, पारंपरिक फर्नीचर और दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह है। इसमें 1866 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना हेतु रानी विक्टोरिया द्वारा जारी किया गया मूल चार्टर, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा हस्तलिखित समझौता-पत्र (जिस पर काज़ी बनारस की मुहर अंकित है), इंदिरा गांधी का 1975 का ऐतिहासिक चुनाव याचिका प्रकरण, 1922 का चौरी-चौरा कांड, तथा 1572 से 1665 के बीच के मुग़ल फरमान भी शामिल हैं।
इस अवसर पर तीन नए जीवन सदस्य बनाए गए जिन्हें सदस्यता प्रमाण-पत्र एवं बैज प्रदान किए गए- श्रीमती श्रुति अग्रवाल, श्री सरांश श्रीवास्तव और श्रीमती शोभा मिश्रा।
इस अवसर पर इंटैक प्रयागराज चैप्टर के संयोजक श्री शंभू चोपड़ा ने कहा, “इस संग्रहालय का दौरा करना केवल एक ऐतिहासिक यात्रा नहीं, बल्कि न्यायिक विरासत के प्रति श्रद्धा अर्पण करने जैसा अनुभव है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की समृद्ध परंपरा और अभिलेखों को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक युवा और शोधकर्ता इस संग्रहालय से जुड़ें। इंटैक प्रयागराज चैप्टर इस दिशा में प्रयासरत है।”
सह-संयोजक अनुपम परिहार ने कहा, “यह संग्रहालय हमारे शहर की न्यायिक चेतना और सांस्कृतिक इतिहास का अमूल्य दस्तावेज़ है। यहां संग्रहीत दस्तावेज़ों और वस्तुओं को देखकर इतिहास सजीव हो उठता है। गोस्वामी तुलसीदास की लेखनी से लेकर आधुनिक काल की घटनाएं-सब कुछ यहाँ संरक्षित है। इंटैक प्रयागराज चैप्टर का प्रयास है कि ऐसे स्थलों को जन-सामान्य के लिए सुलभ और रोचक बनाया जाए।”
कार्यक्रम का समापन शंभू चोपड़ा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर श्री अनुपम परिहार (सह-संयोजक), वैभव मैनी (सचिव), निलेश नारायण (जनसंपर्क एवं कार्यक्रम समन्वयक), सुधांशु अग्रवाल (कोषाध्यक्ष) सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।यह आयोजन प्रयागराज की न्यायिक धरोहर के संरक्षण और जनजागरूकता की दिशा में एक प्रेरक पहल सिद्ध हुआ।
Anveshi India Bureau



