सुधीर सिन्हा,प्रयागराज।एशिया के सबसे बड़े कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर सुशील सिन्हा के पदभार संभालते ही इनके विरोधी खेमे के लोग कुछ न कुछ ऐसा विवाद उत्पन्न कर रहे हैं जिसका डट कर सुशील सिन्हा सामना ही नहीं कर रहे हैं बल्कि उनको मुंह तोड़ जवाब देकर उनके सारे मनसूबे पर पानी फेर दे रहे हैं।ऐसा ही एक नया विवाद उत्पन्न किया कुमार नारायण और इनके साथियों ने जिन्होंने वर्तमान अध्यक्षके ख़िलाफ़ 720 लोगों की अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन की एक सूची भेज कर डॉक्टर सुशील सिन्हा को पद मुक्त करने की मांग उठाई।वहीं ट्रस्ट के महामंत्री गोपी कृष्ण श्रीवास्तव और अन्य लोगों ने सूची की गहनता के साथ जांच करने के साथ ही व्यक्तिगत लोगों से संपर्क साध कर इसकी सत्यता का पता लगाया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए दरअसल जांच के पश्चात 720 लोगों में से 307लोग फर्जी पाए गए जिसके चलते अविश्वास प्रस्ताव अपने आप इस लिए भी ख़ारिज हो गया क्योंकि कायस्थ पाठशाला के बनाए गए नियम 40 के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव के लिए कम से कम 500 सदस्यों की संख्या का होना अनिवार्य है।इन्हीं सब बातों को लेकर शनिवार को कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष डॉक्टर सुशील सिन्हा प्रेस क्लब में मीडिया कर्मियों से मुखातिब हुवे।अपनी बातों को रखते हुवे उन्होंने कहा कि मैं प्रत्येक कायस्थ को मात्र 100 रुपए की सदस्यता शुल्क के साथ जोड़ना चाहता हूं जिसका पुराने मठाधीशों ने शुल्क 2100 कर रखा था और कायस्थ पाठशाला को वो अपनी जागीर समझते हैं। इसी लिएमेरे इस सदस्यता शुल्क के विरोधमे वो साजिश रचते हुवे लामबंद होकर कुचक्र रच रहे हैं ताकि 27 अक्टूबर को होने वाली गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इसे पास न कराया जा सके और ये अविश्वास प्रस्ताव भी उसी विरोध की परिणीत है जो सफलनहीन हो पाई और स्वतः फेल हो गई और जालसाजी काने वाले मठाधीशों की पोल खुल गई जिन्हें मुंह की खानी पड़ी।यही नहीं डॉक्टर सुशील सिन्हा ने मीडिया कर्मियों को ये भी जानकारी दी कि कुमार नारायण व अन्य के द्वारा 19 सितंबर को स्पीड पोस्ट के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव को प्रेषित किया गया था।इसपर हमारे महामंत्री वीर कृष्ण श्रीवास्तव ने इसके जवाब में कुमार नारायण से अनुरोध किया कि आप गवर्निंग काउंसिल के निर्णय के उपरांत अविश्वास प्रस्ताव को प्रेषित कीजिए लेकिन वो और कुछ तथा कथित लोग मिलकर गवर्निंग काउंसिल की 27 अक्टूबर होने वाली बैठक के एक सप्ताह पूर्व 20अक्टूबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक कर रहे हैं जो पूरी तरह से अवैध ही नहीं बल्कि उनकी हताशा को प्रदर्शित करता है क्योंकि कुमार नारायण निलंबित किए जा चुके हैं और वो कायस्थ पाठशाला के प्राथमिक सदस्य हैं ही नहीं बावजूद वो कायस्थ पाठशाला के विरुद्ध क्रिया कलापों को अंजाम देने में जुटे हुवे हैं।श्री सिन्हा ने कहा कि मैं आन कायस्थों को जोड़ने के क्रम में लगा हुआ हूं मेरा उद्देश्य लोगों को जोड़ने का है तोड़ने का नहीं ।परन्तु कुमार नारायण के साथ जाल साजी में श्री टी पी सिंह,श्री राघवेंद्र सिंह एवं कौशलेंद्र सिंह जी शामिल हैं और अतिशीघ्र ही हमारी लीगल सेल इनके विरुद्ध अपनी कार्यवाही करेगी।उन्होंने अपनी बात को रखते हुवे कहा कि माननीय गवर्निंग काउंसिल ने अपने 15 सितंबर 24की बैठक में माननीय सदस्यों के द्वारा प्रेषित प्रस्ताव जिसमें नियम 40 को अवैधानिक घोषित करना एवं उसके क्रियान्वयन को रोकने की मांग की गई थी को पारित करते हुवे सिलेक्ट कमेटी का गठन कर दिया गया था और अब27 अक्टूबर को इस पर चर्चा होनी थी लेकिन ये लोग अपनी मठाधीशी को बचाने के लिए और 100रुपए सदस्यता शुल्क का विरोध करने के लिए इतने आतुर हो गए कि आनन फानन में अविश्वास प्रस्ताव की अवैध बैठक को बुला लिया जो नियम विरुद्ध है कुमार नारायण को गवर्निंग काउंसिल की बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं है इन्होंने खुले शब्दों में कहा कि अब जो भी कायस्थ पाठशाला के नियम विरुद्ध कार्य जो करेगा उसके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा ।इन्होंने मीडिया कर्मियों से भी अपील करते हुवे कहा कि आप लोग भी ये। सूचना आम कायस्थों तक जरूर से पहुंचाए कि आम कायस्थ मात्र 100 रुपए की सदस्यता शुल्क के साथ कायस्थ पाठशाला से जुड़े और इसका सीधा लाभ उठाए और किसी के बरगलाने में न आ कर 27तारीख को होने वाली 100 की सदस्यता शुल्क को पूर्णरूप से पास करते हुवे सभी कायस्थों के हाथों को मजबूती प्रदान करें।
Anveshi India Bureau



