Kanpur News: ग्वालटोली पुलिस द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की गई शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने पानी फेरते हुए रिमांड अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। लुटेरी दुल्हन मामले के बाद इस केस में भी पुलिस की किरकिरी हुई है, क्योंकि सात साल से कम सजा वाली धाराओं में गिरफ्तारी को कोर्ट ने उचित नहीं माना।
कानपुर में ग्वालटोली थाने की पुलिस ने एक बार फिर न्यायालय में कमिश्नरी पुलिस की किरकिरी करा दी। इस बार लैंबोर्गिनी हादसे में सात साल से कम सजा वाली धाराएं लगी होने के बावजूद पुलिस चालक शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट ले गई। कोर्ट ने आरोपी को रिमांड पर लेने की पुलिस की अर्जी को खारिज कर दिया। शिवम को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। इससे पहले पुलिस ने जिस महिला को लुटेरी दुल्हन बताकर जेल भेजने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण उसे भी रिहा कर दिया था।
लुटेरी दुल्हन की तरह लैंबोर्गिनी मामला भी पुलिस के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला साबित हुआ। पीड़ित तौफीक की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और घटना स्थल पर मौजूद गवाहों के बयानों के आधार पर शिवम मिश्रा द्वारा कार चलाए जाने का दावा किया। पुलिस ने आरोपी की करोड़ों की लैंबोर्गिनी कार को सीज कर दिया। पुलिस ने सख्ती की तो अगले दिन तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा अपने बेटे शिवम की ओर से पक्ष रखने ग्वालटोली थाने पहुंच गए।
पुलिस ने नोटिस न लेने को गिरफ्तारी का आधार बनाया
वहां उन्होंने शिवम के अस्वस्थ होने की बात कही और बताया कि घटना के वक्त कार में शिवम के अलावा उनका चालक भी था। बुधवार को पूरे घटनाक्रम में उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब शिवम के चालक मोहनलाल और पीड़ित तौफीक के बीच समझौते का दावा किया गया और पीड़ित की ओर से कार्रवाई से इन्कार कर दिया गया। हालांकि, पुलिस ने इस समझौते को नकार दिया था। अचानक गुरुवार सुबह शिवम को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने नोटिस न लेने को गिरफ्तारी का आधार बनाया था।
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