सावन महीने में कांवड़ियों की भारी भीड़ संगम तट और दशाश्वमेध गंगा घाट पर उमड़ रही है। बोल बम के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान है। प्रयागराज से गंगा जल लेकर कांवड़िये काशी विश्वनाथ समेत अन्य प्रमुख महादेव मंदिरों के लिए रवाना हो रहे हैं। सावन की शिवरात्रि के चलते मनकामेश्वर महादे समेत अन्य मंदिरों में भी भक्तों की लंबी कतार सुबह से ही लगी रही। सावन महीने में कांवड़ियों की भारी भीड़ संगम तट और दशाश्वमेध गंगा घाट पर उमड़ रही है। बोल बम के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान है। प्रयागराज से गंगा जल लेकर कांवड़िये काशी विश्वनाथ समेत अन्य प्रमुख महादेव मंदिरों के लिए रवाना हो रहे हैं। डीजे, बाजे के साथ नाचते गाते हुए कांवड़िये दिनरात पैदल चल रहे हैं। प्रयागराज-वाराणसी हाईवे भगवामय और शिवमय हो गया है। हाईवे की उत्तरी लेन शिवभक्तों के लिए आरक्षित कर दी गई है। सावन की शिवरात्रि महापर्व होने के चलते शिवभक्तों ने मंदिरों में भी विधि विधान से पूजन कर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया। यमुना तट पर स्थित श्री मनकामेश्वर महादेव, सिविल लाइंस के हनुमत निकेतन शिव मंदिर, शिवकुटी स्थित शिवकोटि, मुट्ठीगंज के ताला वाले महादेव मंदिर, अरैल के सोमेश्वर, यमुनापार के सुजावन देव और गंगापार फाफामऊ स्थित पड़िला महादेव मंदिर में हजारों कांवड़ियों के साथ शिवभक्त महिला पुरुषों की लंबी कतार लगी रही। 24 जुलाई को रवाना होगा नवयुवक कांवड़ियों का जत्था
सावन के महीने में करैलाबाग के नवयुवक कांवड़ियों का जत्था बाबा काशी विश्वनाथ धाम के लिए 24 जुलाई को सुबह 8 बजे रवाना होगा। इसमें शामिल कांवड़िये करैलाबाग बालू मंडी से डीजे, भांगड़ा और बैंड के साथ दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट से जलभर कर वाराणसी के लिए पैदल प्रस्थान करेंगे। नागपंचमी के दिन जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद प्रयागराज लौटकर भंडारे का आयोजन होगा। गौरतलब है कि कांवड़ियों का यह जत्था पिछले करीब 25 साल से जल भरकर यहां से रवाना होता है। यात्रा में कई झांकियां भी शामिल की जाती है। कांवडियों के इस जत्थे में सुमित निषाद, कुंवर निषाद, जवाहर लाल प्रजापति, अमन निषाद और संजू खास तौर से शामिल रहते हैं।
शिव भक्तों से भरे शिवालय, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
सावन के दूसरे सोमवार को हर शिवालय में शिव भक्तों ने आस्था और उत्साह के साथ दर्शन-पूजन किया। शिव भक्तों की भीड़ से भरे शिवालयों में लगातार हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। रोहिणी नक्षत्र के साथ ही वृद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में भक्तों ने बाबा भोलेनाथ की पूजा की। वहीं कांवड़िये भी दशाश्वमेध घाट से जल भरकर अलग-अलग शिवालयों के लिए रवाना होते रहे।
यमुना किनारे स्थित श्री मनकामेश्वर मंदिर, कटघर स्थित भोले गिरि मंदिर, सिविल लाइंस के हनुमत निकेतन स्थित शिव मंदिर, दारागंज स्थित दशाश्वमेध मंदिर, नैनी स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर, शिवकुटी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर, शिवकुटी स्थित शिव कचहरी मंदिर, दरियाबाद स्थित तक्षकेश्वर नाथ मंदिर और फाफामऊ स्थित पड़िला महादेव समेत अन्य मंदिरों में सुबह से रात तक भक्त पहुंचते रहे।
श्री मनकामेश्वर मंदिर के बाहर सुबह चार बजे के पहले ही भक्तों की कतार लग गई। यहां सुबह चार बजे मंगला आरती हुई। उसके बाद शिव भक्तों ने दर्शन-पूजन किया। भारी भीड़ के चलते इस मंदिर में रुद्राभिषेक की मनाही रही। पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की मौजूदगी के बीच मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर भक्त दर्शन-पूजन करते रहे।
सुबह 11:15 बजे भोग के लिए श्री मनकामेश्वर मंदिर बंद किया गया। सुबह 11:30 बजे भोग लगने के बाद फिर दर्शन-पूजन शुरू हुआ। रात 10 बजे शृंगार आरती के लिए मंदिर बंद हुआ। रात 10:30 बजे से 11 बजे तक शृंगार आरती हुई। इसी तरह सभी मंदिरों में समय सारिणी के मुताबिक दर्शन-पूजन कराया गया। उधर, पं. आशीष दुबे ने बताया, दशाश्वमेध घाट पर एक दिन में छह हजार से ज्यादा कांवड़िये गंगा जल भरकर अलग-अलग धामों के लिए रवाना हो रहे हैं।
Courtsy amarujala



