माघ मेले में साधना के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। वहीं, दो तोते शिव और देव भी कल्पवास कर रहे हैं। झूंसी निवासी अनीता तिवारी दोनों की पालन माता हैं। उन्होंने बताया कि 2023 में नवरात्र के दौरान उनके बेटे दिव्यांश ने दोनों को घर लाया था।
माघ मेले में साधना के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। वहीं, दो तोते शिव और देव भी कल्पवास कर रहे हैं। झूंसी निवासी अनीता तिवारी दोनों की पालन माता हैं। उन्होंने बताया कि 2023 में नवरात्र के दौरान उनके बेटे दिव्यांश ने दोनों को घर लाया था। उसी ने इनका नाम शिव और देव रखा। बेटा बाहर टहलने गया था। इसी बीच उसने देखा कि एक पेड़ पर से चार अंडे गिरकर टूट गए थे, जिनमें से दो बच्चे जीवित थे।
दिव्यांश उन्हें घर ले आया और रुई की मदद से अंगूर का जूस पिलाकर उनकी देखभाल शुरू की गई। अब ये दोनों परिवार का हिस्सा बन गए हैं। दोनों अपनी भाषा में उन्हें मम्मा और पालन पिता भुवनेश्वर नाथ तिवारी को पापा कहकर पुकारते हैं। उनके मुताबिक दोनों सुबह उठकर गंगा स्नान, सीता-राम नाम का जप करने के साथ ही लड्डू गोपाल को नहलाने और खाना खिलाने के लिए बोलते हैं। ऐसा ये तीन साल से कह रहे हैं।
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