गोपाल गिरी श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़ के नागा संन्यासी हैं। उनके गुरु थानापति सोमवार गिरी महाराज हैं। वहीं इस कड़ाके की ठंड में गोपाल गिरी निर्वस्त्र अपने गुरु भाइयों के साथ शरीर पर भस्म लगाए महादेव जी की भक्ति लीन रहते हैं।
संगम की रेती पर नौ वर्षीय नागा संन्यासी गोपाल गिरी महाराज शरीर पर भस्म लगाए महादेव की भक्ति में रमे हैं। वह हिमाचल के चंबा से यहां पर आए हैं। तीन वर्ष की आयु में ही उनके माता-पिता गुरु दक्षिणा में नागा संन्यासी को सौंप दिए थे।
गोपाल गिरी श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़ के नागा संन्यासी हैं। उनके गुरु थानापति सोमवार गिरी महाराज हैं। वहीं इस कड़ाके की ठंड में गोपाल गिरी निर्वस्त्र अपने गुरु भाइयों के साथ शरीर पर भस्म लगाए महादेव जी की भक्ति लीन रहते हैं। माता-पिता के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि गुरु ही उनके माता-पिता हैं। उनकी सेवा और प्रभु की भक्ति करने में ही उन्हें परमानंद की अनुभूत होती है। उन्हें अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं पता हैं।




