विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में संगम की रेती पर महाकुंभ का हिस्सा बनने आईं अमेरिका की अरबपति महिला लॉरेन पॉवेल जॉब्स कल्पवास बीच में ही छोड़ दिया है।
विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में संगम की रेती पर महाकुंभ का हिस्सा बनने आईं अमेरिका की अरबपति महिला लॉरेन पॉवेल जॉब्स कल्पवास बीच में ही छोड़ दिया है। तीन दिन वह अपने गुरु कैलाशानंद के शिविर में संन्यासिनी वेश में रहीं। वह संगम में डुबकी भी नहीं लगा सकीं। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप के शपथ समारोह में हिस्सा लेने के लिए वह अमेरिका रवाना हो गई हैें।
अमेरिका के अरबपति कारोबारी स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स महाकुंभ में कल्पवास के लिए पहुंच गई हैं। उनके गुरु निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ने उनको कल्पवास के लिए महाकुंभ में कमला नया नाम दिया है। कमला पौष पूर्णिमा पर प्रथम डुबकी के साथ कल्पवास आरंभ करेंगी।
लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने सेक्टर-नौ में कैलाशानंद के शिविर में रहकर सनातन परंपरा के कठिन अनुशासन के तौर पर सिर्फ तीन दिन कल्पवास किया। महाकुंभ के दौरान वह सादगी भरा जीवन बिताते हुए संगम की रेती पर जहां सनातन की संस्कृति से परिचित हुईं, वहीं कल्पवासी महिलाओं के साथ भजनों पर भक्तिभाव में मगन भी नजर आईं। सेक्टर नौ में ही कल्पवासी महिलाओं के शिविरों में उन्होंने ढोल, झाल पर झूमती-थिरकती रहीं।
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