पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच विदेश मंत्रालय ने कंट्रोल रूम बनाकर भारतीयों की मदद शुरू कर दी है। अब तक हमलों में दो भारतीयों की जान गई है और एक लापता है। खाड़ी देशों में घायल भारतीयों का इलाज जारी है और दूतावास उनके संपर्क में है। सरकार नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। एक अन्य भारतीय नागरिक अभी भी लापता है। ये लोग उन जहाजों पर काम कर रहे थे जिन्हें संघर्ष के दौरान निशाना बनाया गया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन मौतों की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद कर रही है और स्थिति पर नजर रखे हुए है। मंत्रालय ने भारतीयों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक खास कंट्रोल रूम भी बनाया है। यह कंट्रोल रूम लगातार काम कर रहा है। यहां भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कई फोन आ रहे हैं और अधिकारी लोगों को जरूरी सलाह दे रहे हैं।
खाड़ी देशों में भी कुछ भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। दुबई में घायल हुए एक भारतीय नागरिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भारतीय दूतावास इन सभी लोगों के साथ लगातार संपर्क में है। सरकार उनकी सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है।
यह संकट होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सबसे ज्यादा बढ़ गया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हाल के दिनों में यहां कई व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं। बुधवार को भी इस इलाके में तीन जहाजों पर गोले दागे गए। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस समुद्री रास्ते को असुरक्षित बना दिया है।
सुरक्षा कारणों से कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को रोक दिया है या उनका रास्ता बदल दिया है। सैकड़ों टैंकरों को समुद्र में ही लंगर डालने पर मजबूर होना पड़ा है। इन हमलों ने दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है।
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