Friday, January 23, 2026
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नगर विकास मंत्री ने देश, प्रदेश एवं दुनियाभर के सभी समुदायों, जातियों, धर्मों के लोगों को महाकुंभ में आने के लिए किया आमंत्रित

उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए0के0 शर्मा ने महाकुम्भ-2025 की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं को लेकर कहा कि इस बार के कुम्भ मेला क्षेत्र में व्यापक तैयारियां की गयी हैं। स्वच्छता, सफाई, सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए आधुनिक तकनीकी, मशीन एवं मैनपावर का सहयोग लिया जा रहा है। पवित्र संगम में डुबकी लगाने के लिए देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है। कुम्भ में आने वाले सभी श्रद्धालु स्वच्छता व अन्य व्यवस्थाओं की प्रशंसा भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक संगम में 07 करोड़ से अधिक लोग स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। 26 फरवरी तक में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम में आने की संभावना है। जिसके लिए केन्द्र एवं प्रदेश सरकार हर संभव व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ सभी मानव समुदाय को एक धागा एक सूत्र में पिरोने वाला महापर्व है। देश, प्रदेश एवं दुनियाभर के सभी समुदायों, जातियों, धर्मों के लोगों को महाकुंभ में आने के लिए आमंत्रित करता हूॅ, जिससे कि दुनियाभर के लोग महाकुंभ में आकर भारत की प्राचीन संस्कृति, विरासत, सभ्यता एवं अध्यात्मिकता को दिखाने के साथ इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित एवं व्यवस्थित करने की आधुनिक भारत की क्षमता, तकनीकी उपयोग एवं डिजिटल इंडिया के सपने को दिखाने का भी अवसर है।

नगर विकास मंत्री ने कहा कि इस बार के महाकुम्भ में 144 वर्ष बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जिसके पुण्य प्राप्ति के लिए हर कोई उत्सुक है और महाकुम्भ आना चाहता है। महाकुम्भ के 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेला क्षेत्र में जातपात, ऊंचनीच का भेदभाव किये बगैर सभी आगन्तुकों को मुफ्त भोजन कराया जा रहा है। मौनी अमावस्या 29 जनवरी को दूसरा शाही स्नान के दिन भी करोड़ों श्रद्धालुओं की अप्रत्यासित भीड़ पवित्र संगम में डुबकी लगायेगी, जिसके लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है। इस बार का महाकुम्भ सबसे पवित्रतम, दिव्य, भव्य, स्वच्छ, सुंदर एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराया जा रहा है। प्रयागराज में पूरे देश दुनिया का सबसे बड़ा आस्था का संगम एवं धार्मिक समारोह का आयोजन हो रहा है। यहां तक कि श्रद्धालुओं के पहुंचने की दृष्टि से देखा जाए तो यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। जिसको सकुशल व्यवस्थित रूप से बिना किसी बाधा व अड़चन के आयोजित किया जा रहा है। उन्हांेने कहा कि हमारे पौराणिक ग्रन्थों में भी महाकुम्भ की प्रशंसा में कहा गया है कि-’माघ मकर गति रवि जब होई। तीरथ पतिहिं आव सब कोई।। देव दनुज किन्नर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेनी।।’

 

 

श्री ए0के0 शर्मा ने कहा कि देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालु इस बात से अचंभित एवं आश्चर्यचकित हैं कि मोदी जी और योगी जी के नेतृत्व में कैसे अनुशासित तरीके से एक विशाल जनसैलाब के साथ व्यवस्थित तरीके से पूरी स्वच्छता-सफाई, बिजली, पानी एवं सुरक्षा के साथ महाकुम्भ आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए मानव पुरूषार्थ के साथ आधुनिक तकनीकी और मशीन का प्रयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि कुम्भ मेला क्षेत्र में भीड़ की निगरानी के लिए 2700 एआई पावर्ड कैमरे और ड्रोन माउंटेड कैमरे मेला क्षेत्र में लगाये गये हैं। लोगों को अपनी समस्याओं और परिजनों को ढूढ़ने के लिए 50 हजार से अधिक बिजली के खम्भों में जीआईएस मैपिंग आधारित क्यूआर कोड स्थापित किये गये हैं। साथ ही 250 वाटर एटीएम, 58 हजार जलनल तथा 1.50 लाख से ऊपर शौचालयों को स्थापित किया गया है। हजारों की संख्या में टेंट व पंडाल स्थापित किये गये। स्वच्छता सफाई के लिए डस्टबिन रखवाये गये तथा 15 हजार से अधिक सफाई मित्र, 1000 से अधिक मशीने लगायी गयी है। उन्हांेने आश्वस्त किया कि सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा, व्यवस्था एवं सुव्यवस्थित स्नान सहित मेला क्षेत्र की सफाई स्वच्छता के बेहतर इंतजाम किये गये हैं। महाकुम्भ भारतीय संस्कृति की बहुत ही पुरानी विरासत एवं आस्था का केन्द्र है। जिसको विदेशी संस्थाओं यूनेस्को आदि ने भी इन्टैन्जुबुल वर्ल्ड हेरीटेज आफ हयूमैनटी मानकर मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी प्रयाग की महत्ता में कहा है कि ’को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।। अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।’ उन्होंने कहा कि पुराणों में भी जिक्र है कि माघ मास में त्रिदेव ब्रम्हा, विष्णु, महेश, यक्ष, नर किन्नर सभी संगम आते हैं। महाकुंभ भाईचारा व एकता का भी प्रतीक बन गया है। देश दुनिया के कोने कोने से बिना किसी भेदभाव, भय व शंका के आ रहे हैं और आस्था के पवित्र संगम मंे डुबकी लगा रहे हैं। पूरी दुनिया महाकुंभ के सफल आयोजन से अचंभित है।

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