Wednesday, February 18, 2026
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प्रताप गोपेन्द्र को उनकी कृति ” चंद्रशेखर आजाद : मिथक बनाम यथार्थ ” के लिए मिला सम्मान

चित्तौड़गढ़। विरासत का गर्व करना अच्छी बात है किंतु विरासत के संदेश को व्यापक बनाना और उसे सामाजिक सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। संभावना संस्थान ने मेवाड़ के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामचंद्र नंदवाना की स्मृतियों को सहजने का जैसा अनुष्ठान किया है वह सचमुच अनुकरणीय है। सुपरिचित लेखक और निबंधकार डॉक्टर दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने स्वतंत्रता सेनानी रामचंद्र नंदवाना स्मृति सम्मान समारोह में प्रोफेसर अवधेश प्रधान और प्रताप गोपेंद्र को सम्मानित करते हुए कहा कि इन दोनों लेखकों ने हमारी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी के लिए पुनर्नवा किया है।

आयोजन में वर्ष 2022 के लिए सोपान जोशी की कृति ‘जल स्थल माल’ 2023 के लिए अवधेश प्रधान की सीता की खोज और 2024 के लिए प्रताप भूपेंद्र की कृति चंद्रशेखर आजाद : मिथक बनाम यथार्थ को सम्मानित किया गया। डॉक्टर अग्रवाल, हिंद जिंक मजदूर संघ के महामंत्री घनश्याम सिंह राणावत, प्रोफेसर माधव हाड़ा और शहर के साहित्य प्रेमियों ने लेखकों को शॉल, प्रशस्ति पत्र और राशि भेंट कर अभिनंदन किया। युवा शिक्षक डॉक्टर माणिक ने सोपान जोशी, डॉक्टर रेनू व्यास ने अवधेश प्रधान और महेंद्र खेरारु ने प्रताप गोपेंद्र के लिए प्रशस्ति वाचन किया।

सम्मान ग्रहण करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने अपनी कृति ‘सीता की खोज’ के संदर्भ में कहा कि राजनीति भूगोल की छोटी-छोटी सीमाओं में बांट कर प्रभुत्व का दम भर सकती है लेकिन सीता ने जन मन में सब सीमाओं के ऊपर प्रेम करुणा का जो भाव सेतु बांध दिया है उसे तोड़ना किसी राज्य और सेना के बूते में नहीं है। प्रोफेसर प्रधान ने कहा कि वाल्मीकि से तुलसीदास और लोकवियों तथा लोककाव्यों ने हजारों वर्ष तक लाखों लोगों के हृदय में सीता की भावमूर्तियां गढ़ी है उन्होंने बताया कि वाल्मीकि, महाभारत, भास, कालिदास, भवभूति, तुलसीदास और लोकगीतों की सीता को खोजते हुए उन्होंने पाया कि भारतीय जनमानस में सीता की छवि अत्यंत उज्जवल और पावन है जो हमेशा मनुष्य जीवन को संवेदनशील और संर्घषशील बनाती रहेगी।

 

पुलिस सेवा के अधिकारी और लेखक प्रताप गोपेंद्र ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की वीर भूमि पर इस सम्मान को ग्रहण करना अविस्मरणीय अनुभव है । उन्होंने अपनी कृति के संबंध में कहा कि अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की छवि में मिथक और यथार्थ इतने अधिक घुल मिल गए हैं कि उनकी वास्तविक छवि को प्राप्त करना अत्यंत दुष्कर है। उन्होंने पुस्तक की रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन की पत्रावलियों और दस्तावेजों को खोजने और उनको सही विश्लेषण कर आजाद की वास्तविक पहचान करना उनके लिए चुनौती पूर्ण सफल रहा। इस कृति ने अनेक नवीन तथ्यों का उद्घाटन किया है जिससे आजाद के संबंध में प्रचलित अनेक विरोधाभासों का संधान हो सकता है।

इससे पहले आयोजन में स्वागत भाषण करते हुए संभावना के अध्यक्ष लक्ष्मण व्यास ने बताया कि वर्ष नन्दवाना के शताब्दी वर्ष 2019 से प्रारंभ हुए इस सम्मान में अब तक कुल छ: विधान लेखन की कृतियों को चुना गया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के असामयिक निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। संभावना के सदस्य डॉक्टर गोपाल जाट को कॉलेज शिक्षक में चयनित होने पर डॉक्टर ए. एल. जैन एवं प्रोफेसर सुरेश चंद्र राजोरा ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। विजन कॉलेज ऑफ़ मैनेजमेंट में हुए सम्मान समारोह में एम भंडारी, डॉक्टर सत्यनारायण व्यास, डॉक्टर के. एस. कंग, डॉक्टर भगवान साहू, मुन्नालाल डाकोत, डॉक्टर गोविंद राम शर्मा ,जीएस चौहान, श्रमिक नेता सत्येंद्र कुमार मौर्य, राष्ट्रीय कवि अब्दुल जब्बार, अनिल जोशी, गुरविंदर सिंह सुभाष चंद्र नंदवानाथ मनोज जोशी जेपी भटनागर नंदकिशोर नर्जहार कवि भरत व्यास संतोष कुमार शर्मा, सीमा पारीक, घनश्याम सिंह चौहान, किरण सेठी, विकास अग्रवाल, बाबूलाल कच्छावा, सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। अंत में नन्दवाना परिवार की तरफ से डॉक्टर पल्लव ने आभार प्रदर्शित किया समारोह का आयोजन डॉक्टर कनक जैन ने किया।

 

 

Anveshi India Bureau

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