संगम की रेती पर तंबुओं के शहर में इस बार माघ मेले में ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है कि जो लोग महाकुंभ में नहीं आ सके। ऐसे लोग इस माघ मेले में आकर पुण्य के भागी बन सकते हैं।
संगम की रेती पर तंबुओं के शहर में इस बार माघ मेले में ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है कि जो लोग महाकुंभ में नहीं आ सके। ऐसे लोग इस माघ मेले में आकर पुण्य के भागी बन सकते हैं। अमावस्या और बसंत पंचमी के दिन इस वर्ष पहली बार 75 वर्षों के बाद यानि 76 वें वर्ष में सूर्य मकर राशि में अपने ही दिन यानी प्रवेश कर रहे हैं जिससे माघ मेले में अद्भुत संयोग बना रहा है। यही वजह है कि खाक चौक के साधु संत माघ मेला को मिनी कुंभ की तर्ज पर तैयारियों में जुटे है। संतों में खासा उत्साह हैं। गुजराज, महाराष्ट्र , राजस्थान, बिहार प्रदेशों के लोगों के साथ ही जनकपुर नेपाल सहित कई देशों से श्रद्धालु स्नान करने पहली बार आ रहे हैं।
इस बात का दावा करते हुए खाक चौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगदगुरू संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा ने बताया कि माघ मेला अनादि काल से चला रहा है। उन्होंने बताया कि कुंभ, महाकुंभ और माघ मेला मुहूर्त पर लगते हैं। माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तब माघ मेला लगता है। इस बार आदित्य यानी सूर्य का योग सूर्य के दिवस से ही शुरू हो रहा है जिस दिन सूर्य उत्तरायण होंगे उस दिन रविवार है यह अद्भुत संयोग 75 वर्षों बाद 76 वें वर्ष में हो रहा है। इस बार कई अलग- अलग संप्रदाय के संत भी आ रहे है। थारू, घुमंतु, वनटागियां समुदाय के लोगों के बड़ी संख्या में आने की संभावना हैं।
संगम की त्रिवेणी में स्नान और दान का विशेष महत्व
उन्होंने बताया कि इस संयोग में संगम की त्रिवेणी में स्नान और दान का विशेष महत्व है और इससे जनमानस का भी कल्याण होगा। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ सकती है इसलिए साधु, संतों के शिविरों में भी लोगों के रहने और भोजन की खास तैयारी की जा रही है। वहीं योगी सरकार भी महाकुंभ के बाद आयोजित होने जा रहे इस माघ मेले को मिनी कुंभ के तौर पर आयोजित करने की तैयारियों में जुटी है। सतुआ बाबा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री दो बार माघ मेले की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठकें कर चुके हैं। अमावस्या पर सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर , द्वारचार्य महावीर रोड से प्रस्थान कर पांटून पुल नंबर दो होते स्नान करनें जाएंगे।
सनातन में उत्तम रंग है भगवा : स्वामी ब्रह्माश्रम महराज
इस बार माघ मेले का पूरी तरह से भगवाकरण भी किया जा रहा है। माघ मेले में बनाए जा रहे पांटून ब्रिजों को भगवा रंग में रंगा जा रहा है जिसको लेकर साधु, संत भी उत्साहित हैं। अखिल भारतीय दंडी संयासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने बताया कि भगवा सिर्फ सनातन का ही नहीं बल्कि भगवान भास्कर का उदयित रंग भी है। इसे सनातन में उत्तम रंग माना गया है। उन्होंने कहा कि जब माघ मेले में सूर्य का योग बन रहा है तो प्रशासन ने भी पांटून ब्रिजों को भगवा रंग का करने का जो फैसला लिया है यह सर्वोत्तम है। उन्होंने साधु, संतों से अपील की है कि साधु, संत भी इस मेले में अपने शिविरों की बाउंड्री को भगवा रंग से सजाएंगे।
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