उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले के पावन अवसर पर अपनी कैबिनेट के सहयोगियों के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाई। बतौर सीएम दूसरे कार्यकाल में यह पहला मौका है जब योगी ने माघ मेला के दौरान संगम स्नान किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले के पावन अवसर पर अपनी कैबिनेट के सहयोगियों के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाई। बतौर सीएम दूसरे कार्यकाल में यह पहला मौका है जब योगी ने माघ मेला के दौरान संगम स्नान किया। सीएम योगी द्वारा माघ मेले में किए गए संगम स्नान को वर्ष 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को धार देने वाला बताया जा रहा है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सीएम योगी ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ कुंभ के अवसर पर संगम में डुबकी लगाई थी। उस स्नान के बाद हुए चुनाव में केंद्र में लगातार दूसरी बार मोदी सरकार काबिज हुई थी, जिसे राजनीतिक विश्लेषक एक शुभ संकेत मान रहे थे। कल के स्नान के दौरान सीएम योगी के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी और विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाई। संगम स्नान के बाद सीएम योगी सतुआ बाबा के आश्रम पहुंचे तो आश्रम में कई संतों ने मुख्यमंत्री को विशेष संबोधनों से नवाजा। कुछ संतों ने ‘युवा हिंदू सम्राट’ तो कुछ ने ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहकर सीएम को संबोधित किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक बाजपेयी ने कहा कि संतों के इन संबोधनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यूपी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी के बाद भाजपा अपने सबसे बड़े चेहरे योगी आदित्यनाथ को न सिर्फ एक प्रशासनिक मुखिया के रूप पेश करेगी बल्कि हिंदुत्व के एक बड़े प्रतीक और संरक्षक के रूप में मजबूती से पेश कर सकती है।
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