Tuesday, February 17, 2026
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प्रयागराज पुस्तक मेला: दसवें दिन पुस्तकों का उत्सव, कई कृतियों का हुआ विमोचन

ग्यारह दिवसीय प्रयागराज पुस्तक मेला अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। शनिवार को मेले का दसवां दिन रहा, जिसमें पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिली। रविवार को मेले का समापन होगा। कटरा स्थित द पाम्स रिसोर्ट–रॉयल गार्डन (लक्ष्मी टॉकीज के सामने) में आयोजित इस मेले में पाठकों का उत्साह पूरे दिन बना रहा।

मेले में हिंदी पुस्तकों की बिक्री विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। मुंशी प्रेमचंद, मंटो और रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं के चित्रकथा संस्करण बच्चों को खासे आकर्षित कर रहे हैं। प्रयागराज (इलाहाबाद) से जुड़े विषयों और साहित्य पर आधारित पुस्तकों की मांग भी बनी रही।

युवा पाठकों में धर्मवीर भारती का चर्चित उपन्यास ‘गुनाहों के देवता’ खासा लोकप्रिय रहा। युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर चर्चा के कारण यह पुस्तक एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में दिवंगत साहित्यकार विनोद शुक्ल का उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ भी युवाओं की पसंद बना रहा। इसके साथ ही कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर आधारित मानव कौल की कृति को भी पाठकों ने सराहा।

नए लेखकों में दिव्य प्रकाश दुबे की ‘अक्टूबर जंक्शन’, ‘मुसाफिर कैफ़े’ तथा प्रेम शंकर चरवाना की ‘सरकारी चाय के लिए’ की अच्छी मांग रही। वहीं ‘राग दरबारी’, ‘दिल्ली दरबार’ और प्रेमचंद के ‘गोदान’, ‘गबन’, ‘सेवासदन’ और ‘निर्मला’ आज भी पाठकों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

बीए के छात्र नितिन ने बताया कि वे और उनके मित्र पहले से सोशल मीडिया के माध्यम से पुस्तकों की जानकारी जुटाते हैं और मेले में आकर अपनी पसंद की किताबें खरीदते हैं।

 

इस अवसर पर फोर्स वन बुक्स द्वारा बुकवाला के सहयोग से डॉ. पन्ना लाल और डॉ. अजय कुमार की पुस्तकों ‘भारतीय प्रशासन और पुलिस (प्राचीन काल से आधुनिक काल तक)’ तथा ‘कुछ यादें, कुछ बातें भी – माई डेज विद पुलिस’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह रहे, जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक एस.एन. चक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

प्रयागराज पुस्तक मेला 2025 के अंतर्गत ‘Competitive Exams ka Chakravyuh Kaise Todein’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इसके लेखक अनूप कुमार गुप्ता (आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र, ओएनजीसी) हैं। पुस्तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मार्गदर्शिका के रूप में उपयोगी मानी जा रही है।

इसी क्रम में साहित्य भंडार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कवि एवं आलोचक प्रो. प्रभाकर सिंह की आलोचनात्मक पुस्तक ‘आलोचना के दायरे’ (द्वितीय संस्करण) का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सन्तोष भदौरिया ने की। वक्ताओं ने पुस्तक को छात्रों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमरजीत राम ने किया। इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

यदि आप चाहें तो मैं इसे प्रेस रिलीज, संक्षिप्त न्यूज़ बाइट, या अख़बार में छपने योग्य 300–400 शब्दों के संस्करण में भी ढाल सकता हूँ।

 

Anveshi India Bureau

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