Tuesday, February 17, 2026
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Prayagraj : एचआरआई परिसर में तेंदुए ने कुत्ते के मार डाला, वन विभाग ने दूसरे दिन भी चलाया सर्च आपरेशन

झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान (एचआरआई) परिसर में घुसे तेंदुए का दूसरे दिन भी सुराग नहीं लगा। रात में तेंदुए ने परिसर में एक कुत्ते को मार डाला। सुबह कुत्ते का क्षति विक्षत शव मिलने से लोगों में खलबली मची रही।

झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान (एचआरआई) परिसर में घुसे तेंदुए का दूसरे दिन भी सुराग नहीं लगा। रात में तेंदुए ने परिसर में एक कुत्ते को मार डाला। सुबह कुत्ते का क्षति विक्षत शव मिलने से लोगों में खलबली मची रही। वन विभाग की टीम ने दूसरे दिन भी परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेंदुए का कहीं सुराग नहीं लग सका है। इससे परिसर में छात्रों और शिक्षकों में दहशत की स्थिति बनी हुई है।

शिकार की तलाश में 16 किलोमीटर तक जा सकता है तेंदुआ
तेंदुआ रात के अंधेरे में शिकार की तलाश में कम से कम 15 से 16 किलोमीटर दूर तक जा सकता है। दिन में यह किसी एक जगह पर ठिकाना बनाए रहते हैं और अंधेरा होते ही शिकार की तलाश में निकल जाते हैं।
तकरीबन दो मां पहले हनुमानगंज के विभिन्न गांवों में तेंदुआ देखा गया था। लेकिन, वनकर्मी उसे दबोचने में असफल रहे। आखिरी बार तेंदुए को हनुमानगंज के सुदुनीपुर कला गांव में एक गेस्ट हाउस के पास देखा गया था। वहां से स्कूली बच्चे वैन से जा रहे थे। तभी कार के आगे अचानक तेंदुआ आ गया। इस घटना से स्कूली बच्चे सहम गए थे।

शनिवार की शाम अचानक तेंदुआ झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान परिसर में दाखिल हो गया। फूलपुर के उप वन क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र चौधरी ने बताया कि तेंदुआ दिन में घनी झाड़ियों या जंगल के बीच अपना ठिकाना बनाए रखता है। अंधेरा होते ही वह अपने शिकार की तलाश में निकल जाता है। वन अफसर सत्येंद्र चौधरी की माने तो आदमखोर तेंदुआ अपने शिकार की तलाश में रातभर में तकरीबन 15 से 16 किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है।

झूंसी से हनुमानगंज के सुदुनीपुर कला गांव की दूरी भी तकरीबन इतनी ही है। आशंका जताई जा रही है कि शुक्रवार की शाम वह वहां से निकला होगा और गंगातट होते हुए झूंसी के छतनाग श्मशान घाट तक पहुंच गया। क्षेत्र में यह भी चर्चा थी कि श्मशान घाट के किनारे किसी पशु का मांस खाते भी उसे देखा गया था। तेंदुए के बीच बस्ती में घुसने से छतनाग गांव और उसके आसपास रहने वाले लोग भी सहमे हुए हैं।

आसपास हैं कई आश्रम और कालोनियां

गांव से निकलकर झूंसी की घनी आबादी में तेंदुए के घुसने से लोग सहमे हुए हैं। हरिश्चंद्र शोध संस्थान के बगल में ही बिरला गेस्ट हाउस और एमपी बिरला शिक्षा भवन एवं इंटर कॉलेज भी है। इसके बगल में सदाफलदेव आश्रम है जहां साधु संत एवं सेवक रहते हैं। यहीं से छतनाग रोड तक तकरीबन आधा दर्जन गांव और तकरीबन इतनी ही प्राइवेट कॉलोनियां भी हैं जहां पर हजारों की संख्या में लोग रहते हैं। जैसे ही देर शाम को यह बात फैली कि हरिश्चंद्र संस्थान परिसर के भीतर तेंदुआ घुसा हुआ है। आसपास के लोगों में खलबली मच गई। छतनाग गांव के बगल में ही उस्तापुर महमूदाबाद,नयका महीन, देवनगर कॉलोनी, मायापुरी कॉलोनी, सरायतकी कॉलोनी और ठीक बगल में आवास विकास कॉलोनी योजना तीन में घनी आबादी है। इससे आगे छतनाग रोड पर बढ़े तो चक हरिहरवन की घनी बस्ती है।

 

 

Courtsy amarujala
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