प्रयागराज में पहला सफल गुर्दा प्रत्यर्पण बुधवार को एसआरएन अस्पताल में किया गया। मां ने अपनी किडनी देकर बेटे की जान बचाई है। गुर्दा प्रत्यर्पण की प्रक्रिया करीब एक माह से चल रही थी।
प्रयागराज में पहला सफल गुर्दा प्रत्यर्पण बुधवार को एसआरएन अस्पताल में किया गया। मां ने अपनी किडनी देकर बेटे की जान बचाई है। गुर्दा प्रत्यर्पण की प्रक्रिया करीब एक माह से चल रही थी। गुर्दा प्रत्यर्पण कमेटी की अनुमति मिलने के बाद यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने सफल गुर्दा प्रत्यर्पण किया।
जिले में पहला गुर्दा प्रत्यर्पण किया गया। मोती लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज (एसआरएन) में ट्रांसप्लांट ऑथराइज्ड कमेटी ने मरीज और दान दाता (मां-बेटे) को मंजूरी देने के बाद ट्रांसप्लांट किया गया। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एक माह से इसकी तैयारी कर रहा था। एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व गुर्दा प्रत्यारोपण कमेटी के अध्यक्ष डॉ. वीके पांडेय की अध्यक्षता में किडनी ट्रांसप्लांट ऑथराइज्ड कमेटी की बैठक हुई।
इस दौरान कमेटी के सदस्यों में मौजूद पूर्व आईजी केपी सिंह, एडवोकेट आनंद सिंह, डॉ. जितेंद्र शुक्ला, डॉ. शांति चौधरी, ट्रांसप्लांट क्वाडिनेटर नर्स प्रीति और सुषमा ने मरीज और दान दाता (मां-बेटे) और उनके परिजनों का सत्यापन किया। दस्तावेज जांचने के साथ वीडियो रिकार्डिंग के जरिये सभी का बयान दर्जन किया गया। जिसके बाद कमेटी ने ट्रांसप्लांट को मंजूरी दी। एसआरएन यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया के नेतृत्व में डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. संतोष मौर्य और डॉ. सौम्या गुप्ता की टीम ने किडनी का सफल प्रत्यर्पण किया। पहले इसके लिए लोगों को दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में जाना पड़ता था।
मोहन फाउंडेशन ने कराई है नर्सों की ट्रेनिंग
गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए चिकित्सक के साथ उनकी पूरी टीम का जानकार होना जरूरी होती है। इसके लिए मोहन फाउंडेशन की तरफ से किडनी ट्रांसप्लांट की दोनों नर्स प्रीति और सुषमा की ट्रेनिंग प्रयागराज और लखनऊ के एसजीपीजीआई में कराई गई थी।
ट्रांसप्लांट में आया करीब पांच लाख का खर्च
किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज और दानदाता को मिलाकर करीब पांच लाख रुपये का खर्च आता है। गुर्दा प्रत्यर्पण कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद परिवार में धन की व्यवस्था की। इसके बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई।
किडनी ट्रांसप्लांट ऑथराइज्ड कमेटी की तरफ से मरीज और दान दाता (मां-बेटे) को मंजूरी मिल गई है। जिसके बाद इसी महीने के अंत या फिर फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में गुर्दा प्रत्यारोपण की तैयारी है। – डॉ. दिलीप चौरसिया, विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी विभाग, एसआरएन अस्पताल।
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