Priyanshu Painyuli Exclusive Interview: आनंद एल. राय के निर्देशन में बनी फिल्म तेरे इश्क में ने रिलीज के साथ ही ऑडियंस के बीच खास चर्चा बटोरी है। इस फिल्म में प्रियांशु पेन्युली साउथ सुपरस्टार धनुष के करीबी दोस्त की भूमिका में नजर आए हैं। पर्दे पर उनकी दोस्ती, टकराव और इमोशन ने कहानी को मजबूत आधार दिया है।
अमर उजाला से खास बातचीत में प्रियांशु पेन्युली ने ‘तेरे इश्क में’ फिल्म में अपने किरदार, अपने अभिनय सफर, आने वाले प्रोजेक्ट्स और निर्देशन की नई शुरुआत को लेकर खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

‘तेरे इश्क में’ में आपका किरदार काफी अहम है। इस रोल में ऐसा क्या था जिसने आपको सबसे पहले आकर्षित किया?
मेरे लिए इस फिल्म में आना बिल्कुल भी सोच-विचार वाला फैसला नहीं था। जब आनंद एल. राय जैसे निर्देशक, जिनका मैं लंबे समय से फैन हूं, किसी फिल्म के लिए खुद बुलाएं तो उसे मना करना आसान नहीं होता। ऊपर से हिमांशु शर्मा की लिखी कहानी और धनुष के साथ उनकी दोबारा वापसी ने एक्साइटमेंट को कई गुना बढ़ा दिया। मैं धनुष का कॉलेज के दिनों से फैन रहा हूं और उनकी तमिल फिल्में मैंने बहुत देखी हैं। इतनी बड़ी फिल्म, शानदार स्टारकास्ट और ऐसा किरदार जो बाहर से गुंडा दिखता है लेकिन अंदर से बेहद मासूम है, यह सब मुझे तुरंत पसंद आ गया। इसलिए मैंने बिना एक पल सोचे हां कह दी।
मेरा मानना है कि एक अच्छा अभिनेता बनने के लिए अच्छा इंसान होना सबसे जरूरी होता है और यह बात मुझे धनुष और कृति दोनों में साफ दिखाई दी। धनुष बहुत सहज और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। वहीं कृति इस समय मेरी सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक हैं। वह अपने स्टारडम और खूबसूरती के साथ अपने अभिनय को बहुत ही समझदारी से बैलेंस करती हैं। इस फिल्म में उनका किरदार काफी कॉम्प्लेक्स है और उन्होंने उसे पूरी गहराई के साथ निभाया है। इस बार ऑडियंस उनसे नजरें हटाना ही नहीं चाहेंगे। धनुष के साथ हमारी कैमिस्ट्री पहले दिन से बन गई थी। हम उनकी तमिल फिल्मों और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स पर भी खूब बातें करते थे। आनंद सर का सेट इतना रिलैक्स रहता है कि कई बार एहसास ही नहीं होता था कि हम एक बेहद इंटेंस फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।

शूटिंग के दौरान कोई ऐसा पल जिसे आप जिंदगी भर याद रखेंगे?
ऐसे तो बहुत सारे पल हैं, लेकिन जो बात हमेशा दिल में बसकर रह जाएगी, वह आनंद सर की हर सुबह वाली मुस्कान है। इतनी बड़ी फिल्म होने के बावजूद उनके चेहरे पर कभी कोई तनाव नजर नहीं आया। वह पूरे सेट का माहौल हमेशा हल्का और पॉजिटिव बनाए रखते थे। वह बहुत बड़े फूडी भी हैं, इसलिए हर दिन यह चर्चा जरूर होती थी कि आज दिल्ली से जलेबी आएंगी या छोले भटूरे या मटन। ये छोटी छोटी बातें शूट को और भी यादगार बना देती थीं। धनुष, कृति और प्रकाश जैसे कलाकारों के साथ बिना किसी दबाव के इतना आराम से काम करना मेरे लिए जिंदगी भर का अनुभव बन गया है।
आपकी आने वाली फिल्म ‘पाइरेट्स’ की खासियत क्या है?
पाइरेट्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फिल्म डार्क वेब और हैकिंग की दुनिया को बेहद असली और खतरनाक तरीके से दिखाती है। आम लोगों को बस इतना पता होता है कि हैकिंग होती है और डार्क वेब नाम की कोई चीज होती है। लेकिन इसके अंदर की दुनिया कितनी रहस्यमयी और डरावनी होती है, यह बहुत कम लोग जानते हैं। इस फिल्म के निर्देशक निशा शर्मा ने असली एथिकल हैकर्स के साथ बैठकर इसकी कहानी तैयार की है। मैं इस फिल्म में एक कैब ड्राइवर का किरदार निभा रहा हूं, जो अचानक इस खतरनाक अंडरग्राउंड दुनिया में फंस जाता है। यह फिल्म थ्रिल, कॉमेडी और सस्पेंस का जबरदस्त पैकेज है। ऑडियंस को जो चीजें नकली लगेंगी, उनमें से ज्यादातर असल में पूरी तरह सच होंगी।

‘पान परदा जर्दा’ में लीड निभाना कैसा रहा और इसके लिए आपने अपने किरदार की तैयारी कैसे की क्योंकि इसका टोन काफी तीखा और इंटेंस है?
यह शो मेरे लिए बहुत बड़ा और बेहद खास है। इसका निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जिन्होंने मुझे मिर्जापुर में रॉबिन जैसा हटकर किरदार दिया था। इस बार कहानी भोपाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह एक इंटेंस रोमियो जूलियट लव स्टोरी है, जो अफीम और फैमिली बिजनेस की काली दुनिया से जुड़ी हुई है। मेरे किरदार के लिए मुझे गांव के एक दुबले पतले लड़के जैसा लुक चाहिए था। इसके लिए मैंने करीब तीन महीने तक बहुत सख्त डाइट और एक्सरसाइज की। मेरी कोशिश यही रही कि जब ऑडियंस मुझे पर्दे पर देखें तो वे मुझे पहली नजर में पहचान भी न पाएं।
‘जागर’ के साथ आप निर्देशन और निर्माण में कदम रख रहे हैं। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या था?
मुझे हमेशा से कहानियां बताने का बहुत शौक रहा है। मुंबई आने से पहले भी मैं बेंगलुरु में शॉर्ट फिल्में बनाता था। जागर की कहानी मेरे लिए बेहद पर्सनल है और यह मेरे होम टाउन से जुड़ी हुई है। मैं इस कहानी को काफी समय से लिखता आ रहा था और अपने लैपटॉप में सेव करके रखता था। मुझे पूरा भरोसा था कि अगर इस पर फिल्म बनेगी तो वह फीचर फिल्म के रूप में ही बननी चाहिए। इसलिए मैंने और मेरे साथियों ने इसे खुद इंडिपेंडेंट तरीके से प्रोड्यूस करने का फैसला किया। अब इस फिल्म के साथ कई सीनियर लोग जुड़ चुके हैं। दीपा मोटा, आरती बजाज और शीला बोरा हमें लगातार गाइड कर रहे हैं। एक विदेशी म्यूजिक कंपोजर भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा है। यह सब हमारे लिए बहुत बड़ा हौसला है।

‘जागर’ आपकी फिल्म उत्तराखंड को समर्पित है। आपने कौन सी बातों को सबसे असली रूप में दिखाना चाहा?
मेरा मन यह था कि उत्तराखंड को जैसा मैंने महसूस किया है, वैसा ही ऑडियंस तक पहुंचाया जाए। वहां की पहाड़ों की ऊर्जा, नदियां, जंगल और लोक देवी-देवता मेरी पहली प्राथमिकता रहे। जागर जैसी प्राचीन परंपरा को सही और सच्चे रूप में दिखाना ही मेरा मकसद था। हमने फिल्म में असली जागर शूट किया है। इसमें कहीं भी कोई बनावटी सीन नहीं है। असली पुजारी और असली पूजा के दौरान हमने शूटिंग की है। मैं चाहता था कि ऑडियंस फिल्म देखते वक्त उस जगह की एनर्जी को महसूस करें और उन्हें लगे कि वे सच में पहाड़ों के बीच पहुंच गए हैं।
फिल्मों, वेब शो और अब निर्देशन में आप अपने प्रोजेक्ट कैसे चुनते हैं और आपको सबसे ज्यादा क्या एक्साइट करता है?
मेरे लिए सबसे जरूरी चीज होती है कहानी का इरादा। यह बहुत मायने रखता है कि कोई कहानी क्यों कही जा रही है। फिर चाहे वह कॉमेडी हो, रोमांटिक हो या थ्रिलर हो। मैं हर तरह के किरदार करना चाहता हूं और लगातार नए प्रयोग करना चाहता हूं। निर्देशन और प्रोडक्शन में भी मेरा सपना यही है कि मैं नए लोगों को मौके दूं और लोकल कहानियों को ग्लोबल स्तर तक पहुंचाऊं। मुझे वही चीजें सबसे ज्यादा एक्साइट करती हैं जिनमें सच्चाई होती है और कुछ नया कहने की आग होती है।
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