Friday, January 23, 2026
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Research : सबसे छोटा अणु क्वार्क खोलेगा ब्रह्मांड की उत्पत्ति की राज, इविवि के वैज्ञानिक ने खोजी नई विधि

अविरल का एक रिसर्च पेपर यूरोपियन फिजिक्स जर्नल प्लस व दूसरा पेपर यूके के जर्नल ऑफ फिजिक्स जी ने प्रकाशित किया। इस शोध के आधार पर स्विटजरलैंड की सर्न लैब के एक ग्रुप डेजी सीएमएस ने आगे के शोध के लिए अविरल को गेस्ट साइंटिस्ट के रूप में चुना है। सर्न लैब ने वर्ष 2012 में गॉड पार्टिकल की खोज की थी।

वैज्ञानिक ब्रह्मांड के सबसे छोटे अणु हैवी क्वार्क पर शोध कर पता लगाएंगे कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई। इस दिशा में दो सफल शोध के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के वैज्ञानिक अविरल अखिल को दुनिया की नंबर एक स्विटजरलैंड की सर्न लैब के ग्रुप जर्मनी के डेजी सीएमएस ने बतौर गेस्ट साइंटिस्ट चुना है।

अविरल वहां तीन साल रहकर अन्य वैज्ञानिकों के साथ सबसे छोटे अणु क्वार्क पर शोध कर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के कारणों का पता लगाएंगे। इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग से वर्ष 2023 में एक्सपेरिमेंटल पार्टिकल फिजिक्स में एमएससी करने के बाद अविरल अखिल के 2024 में दो रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए।

उनका एक शोध एनआईसोट्रॉपिक फ्लो व दूसरा न्यूक्लियर माॅडिफिकेशन फैक्टर के विश्लेषण पर आधारित था। अविरल बताते हैं कि बिग बैंग की घटना के बाद जब ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई तो उससे क्वार्क ग्लूओन प्लाज्मा (क्यूजीपी) बना था, जो डिटेक्ट नहीं किया जा सकता।

वैज्ञानिक क्यूजीपी के विभिन्न सिग्नेचरों (निशान) पर अध्ययन करते हैं, जिनमें से एक एनआइसोट्रॉपिक फ्लो के नाम से जाना जाता है। अविरल ने प्रयोगशाला में लेड लेड कॉल्यूजन में एनआईसोट्रॉफिक फ्लो का विश्लेषण किया। इसमें कोलाइड होने पर ढेर सारे पार्टिकल असाधारण ऊर्जा के साथ निकले और इन्हीं पार्टिकल का अध्ययन किया गया।

इस प्रयोग के दौरान पाया गया कि पूरी प्रक्रिया में जिस विधि का इस्तेमाल किया गया, वह हाई ट्रांसवर्स मोमेंटम की व्याख्या कर पा रही है, जो बिग बैंग के बाद घटना व ब्रह्मांड की उत्पत्ति के कारणों का पता लगा पाने में काफी सहायक साबित हो सकती है। 

अविरल का एक रिसर्च पेपर यूरोपियन फिजिक्स जर्नल प्लस व दूसरा पेपर यूके के जर्नल ऑफ फिजिक्स जी ने प्रकाशित किया। इस शोध के आधार पर स्विटजरलैंड की सर्न लैब के एक ग्रुप डेजी सीएमएस ने आगे के शोध के लिए अविरल को गेस्ट साइंटिस्ट के रूप में चुना है। सर्न लैब ने वर्ष 2012 में गॉड पार्टिकल की खोज की थी।

अविरल जर्मनी के डेजी सीएमएस में हैवी क्वार्क पर काम करेंगे, जो ब्रह्मांड का सबसे छोटा अणु है। इस अणु के विश्लेषण के दौरान अविरल ने अपने शोध में जिस विधि का इस्तेमाल किया था, उसका उपयोग भी किया जाएगा। शोध में पता लगाया जाएगा कि बिग बैंग की घटना कब, क्यों और कैसे हुई। इसके बाद बाद पता लगाया जाएगा यह ब्रह्मांड कैसे बना और किस तरह ब्रह्मांड पर जीवन पनपा।

यूनिवर्सिटी ऑफ हैंबर्ग देगी पीएचडी की डिग्री

 

अविरल का सर्न लैब के ग्रुप डेजी सीएमएस के साथ एक्सपेरिमेंटल कॉन्ट्रैक्ट हुआ है लेकिन सर्न लैब पीएचडी की डिग्री नहीं देती है। इस शोध के लिए अविरल को यूनिवर्सिटी ऑफ हैंबर्ग की ओर से पीएचडी की डिग्री दी जाएगी।

 

एक पद के लिए दुनिया भर से आए आवेदन

 

सर्न लैब के ग्रुप डेजी सीएमस में गेस्ट साइंटिस्ट का केवल एक पद था, जिसके लिए दुनिया भर से आवेदन आए थे। इसके लिए नवंबर-2024 में इंटरव्यू हुआ था, जिसमें इविवि के विद्यार्थी अविरल अखिल को इस पद के लिए चयनित किया गया।

 

 

 

 

Courtsyamarujala.com

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