भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए हैं। माघ मेले के दौरान आयोजित किसान चिंतन शिविर में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव -2027 में मायावती टिकट वितरण भी भाजपा के इशारे पर करेंगी। उनका आरोप था कि इससे पहले के चुनावों में भी बसपा ने भाजपा के संकेत पर ही राजनीतिक फैसले लिए हैं।
राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। वोट पड़ने ही नहीं दिए जाते और जिसे चाहती है, उसे जीत का प्रमाण पत्र थमा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर पूरे देश में संघर्ष करने वाला उनका संगठन एकमात्र मजबूत मंच था लेकिन सरकार को यह स्वीकार्य नहीं हुआ। सरकार ने रणनीति के तहत संगठन को कमजोर करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में हजार से अधिक किसान यूनियन खड़ी कर दीं।
ईडी को बताया केंद्र सरकार का थानेदार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को लेकर राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ईडी अब सरकार का थानेदार बन चुका है और चुनावी रंजिश में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने की तैयारी के तहत उनके दल से जुड़े लोगों के यहां छापे मारे गए और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए गए।
38 वर्षों से माघ मेले में किसानों की सहभागिता
प्रयागराज। राकेश टिकैत ने कहा कि माघ मेला हो या कुंभ मेला, पिछले 38 वर्षों से देश भर के किसान संगम स्नान के लिए प्रयागराज आते रहे हैं। झारखंड, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों किसान यहां जुटते हैं। इस दौरान बिजली, सिंचाई, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), भूमि मुआवजा और गन्ने के दाम जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है। उन्होंने कहा कि देश के किसान 24 प्रकार की फसलें उगाते हैं लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें न तो लाभ मिल पा रहा है और न ही लागत निकल रही है। कहा कि हम माघ मेले में आयोजित चिंतन शिविर के माध्यम से मांग करेंगे कि लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ जोड़ कर समर्थन मूल्य तय किया जाए।
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