Tuesday, February 17, 2026
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सीएजी रिपोर्ट से खुलासा : महाकुंभ-2013 में बिना जरूरत ही खरीद लिए थे 9.01 करोड़ के सामान, कार्रवाई की संस्तुति

सीएजी की रिपोर्ट में इन विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए सुधार एवं आवश्यक कार्रवाई के सुझाव दिए गए थे। लोक लेखा समिति की बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक में महाकुंभ-2013 की ऑडिट रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इसमें मेला प्रशासन के अलावा संबंधित विभागों के अफसर भी मौजूद रहे।

महाकुंभ-2013 के मद्देनजर हुए निर्माण कार्यों एवं खरीदारी में हर स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। बिना जरूरत के ही 9.01 करोड़ रुपये के सामान खरीद लिए गए थे, जिनका इस्तेमाल ही नहीं हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में इन विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए सुधार एवं आवश्यक कार्रवाई के सुझाव दिए गए थे। लोक लेखा समिति की बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक में महाकुंभ-2013 की ऑडिट रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इसमें मेला प्रशासन के अलावा संबंधित विभागों के अफसर भी मौजूद रहे।

सीएजी ने महाकुंभ-2013 की ऑडिट रिपोर्ट जुलाई-2014 में ही पेश की थी। इसके अनुसार कई स्तर पर खामियां सामने आई थीं। आयोजन में हुए कुल खर्च में केंद्र एवं प्रदेश की हिस्सेदारी पर भी सवाल उठाए गए थे।आयोजन के लिए 1152.20 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे, इसमें से 1017.37 करोड़ खर्च हुए। केंद्र सरकार ने 800 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन आयोजन के बाद शेष राशि केंद्र सरकार को वापस नहीं की गई। इसका नतीजा रहा कि आयोजन में केंद्र की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत हो गई, जिस पर ऑडिट में आपत्ति उठाई गई थी।
बिना औचित्य के कराए गए कई कार्यों में खर्च हुए करोड़ों रुपये
रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह से 9.01 करोड़ रुपये फंसे भी रह गए। वहीं, नगर निगम ने सफाई के लिए ठेलियां खरीदी थीं, लेकिन 73 फीसदी का उपयोग ही नहीं हुआ। उपयोग नहीं आने वाली ठेलियाें को खुले में रख दिया गया था, जिससे उनमें जंग लग गई, हालांकि सीएजी की आपत्ति के बाद उन्हें शहर की सफाई व्यवस्था में लगाया गया। इसी तरह से 3.61 करोड़ से स्नान घाट तथा 5.11 करोड़ रुपये की लागत से पुलिस छात्रावास का निर्माण कराया गया था, लेकिन उसका भी इस्तेमाल नहीं हुआ था। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, 57.41 करोड़ से सड़क चौड़ीकरण एवं 46.88 करोड़ रुपये से सुदृढ़ीकरण के काम बिना आवश्यक औचित्य के कराए गए। सीएजी ने टेंडर, राशि आवंटन में नियमों की अनदेखी की बात करते हुए भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
  • निर्माण कार्यों तथा सुविधाएं उपलब्ध कराने में सम्नवय का अभाव।
  • श्रद्धालुओं की संख्या के आकलन के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं अपनाया जाना।
  • श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशिष्ट व्यवस्था नहीं थी।
  • पूर्व के आयोजनों में हुई गलतियों को संज्ञान में लेते हुए किसी तरह का सुधार नहीं किया जाना।
  • कार्यदायी संस्थाओं को धन आवंटन में 67 से 375 दिनों की देरी की गई।
  • कुल खर्च 1017.37 करोड़ के सापेक्ष 969.17 करोड़ रुपये के उपयोग का प्रमाणपत्र जुलाई 2013 तक उपलब्ध नहीं हो सका।
  • मेला शुरू होने की तारीख यानी 14 जनवरी तक 59 प्रतिशत निर्माण एवं 19 फीसदी आपूर्ति कार्य पूरे नहीं थे।
  • सड़क निर्माण में खराब सामान लगा दिए गए, जिस पर 11.82 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
  • 20.43 लाख रुपये का अनियमित भुगतान किया गया।
  • भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता व खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में खामियां थीं।
  • यातायात पुलिस, अग्निशमन सेवा, जल पुलिस में नियुक्तियों में 10 से 100 फीसदी तक की कमी थी।
  • अग्निशमन यंत्र 77, एंबुलेंस 60 तथा इमरजेंसी लाइट 100 प्रतिशत से अनुपलब्ध रही।
  • अपशिष्ट प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं थी।

 

 

 

Courtsy amarujala.com

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