Wednesday, February 18, 2026
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Sikandar Movie Review: साज ए गम पर जो खुशी के गीत गाता जाएगा, वो मुकद्दर का सिकंदर जानेमन कहलाएगा, लेकिन..

सलमान खान , रश्मिका मंदाना , सत्यराज , जतिन सरना , काजल अग्रवाल , अंजिनी धवन , शरमन जोशी , प्रतीक बब्बर , संजय कपूर और नवाब शाह आदि

लेखक
ए आर मुरुगादॉस , रजत अरोड़ा , हुसैन दलाल और अब्बास दलाल
निर्देशक
ए आर मुरुगादॉस
निर्माता
साजिद नाडियाडवाला
रिलीज
30 मार्च 2025
रेटिंग
2/5

पता नहीं नए दौर में ‘सिकंदर’ को लेकर क्या ही नया इतिहास बन सकता होगा, लेकिन सच यही है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब पृथ्वीराज कपूर और सोहराब मोदी की फिल्म ‘सिकंदर’ रिलीज हुई तो इसे देशभक्ति की भावना जगाने वाली फिल्म मानते हुए ब्रिटिश सरकार ने कई स्थानों पर प्रतिबंधित कर दिया था। फिल्म को गोवा संघर्ष के दौरान साल 1961 में फिर रिलीज किया गया और इसकी बॉक्स ऑफिस सफलता ने इसके निर्माताओं को इसे फारसी में भी डब करके रिलीज करने का हौसला दिया। तब से सिकंदर और पोरस की कहानी के कई आयाम दर्शक देख-सुन चुके हैं। सलमान खान की नई फिल्म ‘सिकंदर’ का इतिहास से तो कोई लेना देना नहीं, लेकिन हां, ये प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के शीर्षक गीत का गीतकार अनजान का लिखा एक अंतरा है, ‘हमने माना ये जमाना दर्द की जागीर है, हर कदम पे आंसुओं की एक नई जंजीर है, साज ए गम पर जो खुशी के गीत गाता जाएगा, वो मुकद्दर का सिकंदर जानेमन कहलाएगा…!’ सलमान खान की फिल्म ‘सिकंदर’ इन्हीं ढाई लाइनों पर बनी फिल्म है। बेसिक आइडिया फिल्म ‘एनिमल’ में रणविजय के हार्ट ट्रांसप्लांट से उठाया गया है, बाकी जो है सब सलमान खान है।

Sikandar Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Salman Khan Rashmika Mandanna A R Murugadoss Sathyaraj Anjini
प्रेम रतन धन पायो’ पार्ट 2

 

 

एक जमाना रहा है जब सलमान खान की फिल्म कैसी भी हो, कम से कम उसका पहला शो तो हाउसफुल होता ही था। ‘जय हो’, ‘रेस 3’, ‘दबंग 3’, ‘टाइगर 3’ जैसी तमाम फिल्में हैं जो सिर्फ सलमान खान के होने भर से भीड़ खींच लाती रही हैं। फिल्म इसी चक्कर में इतवार को रिलीज हुई। लेकिन, ईद अब भारत मे सोमवार को है लिहाजा इतवार यानी रिलीज के दिन सिनेमाहाल खाली खाली ही नजर आए। फिल्म शुरू होती है तो लगता है कि कहानी वहीं से शुरू हो रही है, जहां कोई 10 साल पहले सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ खत्म हुई थी। सलमान खान फिर रियासत के राजा के रूप में हैं। संजय राजकोट नाम है उनका, लोग उन्हें राजा साब बुलाते हैं। देश में मौजूद कुल सोने के 25 फीसदी के मालिक हैं। उम्र से कहीं कम एक युवती को बचाने के लिए उससे शादी करते हैं और ये युवती यानी अब उनकी पत्नी उनकी सुरक्षा के लिए दिन रात फिक्रमंद रहती है। ये किस्सा क्या था, न रानी साहिबा बताती हैं, न निर्देशक मुरुगादॉस..!

Sikandar Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Salman Khan Rashmika Mandanna A R Murugadoss Sathyaraj Anjini
बदली बदली नजर आई सलमान की कद काठी
फिल्म ‘सिकंदर’ देखते समय न जाने क्यूं बार बार ये लगता रहता है कि पूरी फिल्म में सलमान खान हैं भी नहीं। उनकी कद काठी में बार बार फर्क नजर आता है। चेहरा दिखने की बारी होती है तो मानना पड़ता है कि वह सलमान खान ही हैं, लेकिन तमाम लॉन्ग शॉट्स और बैक टू कैमरा शॉट्स में यूं लगता है जैसे उनकी जगह कोई और ही शूटिंग कर रहा है। हो सकता है ये देखने का भ्रम हो लेकिन इस चक्कर में दर्शक की किरदार के साथ ‘ट्यूनिंग’ नहीं बन पाती है, कुछ कुछ वैसे ही जैसे कि सलमान खान और रश्मिका मंदाना की लव स्टोरी से दर्शकों की एक परसेंट भी ट्यूनिंग नहीं बनती। दोनों में प्यार है, ये हमें शुरू में बता दिया जाता है। राजा साब के पास समय नहीं है अपनी रानी के लिए। उसे एक पल तक मांगना पड़ता है और उसी एक पल में वो गाना गा देती है, ‘कल आपके नसीब में ये रात हो न हो…’। अब गाना गा दिया है तो उसे मरना ही है, मरते मरते उसका दिल, फेफड़ा और आंखें तीन अलग अलग लोगों को मिल जाती हैं। ‘जय हो’ याद है न, एक अच्छा आदमी, तीन अच्छे आदमी बनाए तो ये चेन कैसे देश को बदल सकती है, टाइप्स!

Sikandar Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Salman Khan Rashmika Mandanna A R Murugadoss Sathyaraj Anjini
साल 2025 में मनमोहन देसाई जैसा सिनेमा
लेकिन, यहां कहानी का सेट अप बनाने के लिए फिल्म के शुरू में प्रतीक बब्बर को लुच्चागिरी करते दिखाया जाता है। हवाई जहाज के बिजनेस क्लास में। पोर्न का धंधा छोड़ घरेलू जिंदगी जी रही एक महिला को उसके बच्चे के जरिये ब्लैकमेल की कोशिश करते एक नेता के बेटे के रूप में हैं प्रतीक। बेटा यहां तो नहीं लेकिन आगे मारा जाता है और नेता अब संजय राजकोट की पत्नी के अंग पाए तीनों लोगों को मार देना चाहता है! पता नहीं क्या फूंककर ऐसी कहानियां लिखी जाती हैं, लेकिन ये जो भी फूंक रहे हैं, वह असली नहीं है। कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा जैसी कहानियों में हुसैन दलाल और अब्बास दलाल ने क्या ही कुछ किया होगा, ये फिल्म की कास्टिंग देखते ही समझ आ जाता है, जिसमें जहां जहां मौका मिला टाइपिंग करने वाले न ज क नीचे नुक्ता चिपका दिया है, जरूरी है तो भी और जहां नहीं जरूरी है, वहां तो चिपका ही दिया है। कहने को रजत अरोड़ा भी है। बस कहने को। हिंदी फिल्में ऐसे ही नहीं लंगड़ाती रहती है। कहानी बेतुकी, पटकथा बिखरी हुई और संवाद, अमिताभ बच्चन की फिल्मों से मारे हुए। क्या ही कुछ हो सकता है ऐसे ‘सिकंदर’ का। गुजराती बोलने वाला एक राजा दिल्ली में सीधे किसी से गुजराती में बात करता है और काम हो जाता है…! अबकी बार, राजकोट सरकार!!

Sikandar Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Salman Khan Rashmika Mandanna A R Murugadoss Sathyaraj Anjini
कब प्रशंसकों के लिए एक्टिंग करेंगे सलमान?
सलमान खान से एक्टिंग अब होती नहीं है, होती पहले भी कम ही थी, लेकिन पहले वह इसके लिए कोशिश तो करते ही थे। अब वह अपने प्रशंसकों पर एहसान करते से दिखते हैं। उनको निर्देशित करने वाले निर्देशकों की मानें तो ऐसा एहसान वह अपनी फिल्मों के निर्माताओं पर भी करते रहते हैं। सलमान खान का बड़ा नाम रहा है हिंदी सिनेमा में। ‘मैंने प्यार किया’ वाले प्रेम से करोड़ों ने प्रेम किया है। लेकिन, अब प्रेम प्रेम न रहा, उसकी एक्टिंग पर लोगों को एतबार भी न रहा। पर क्या करें प्रशंसक हैं तो हर फिल्म में दौड़े चले आते हैं, कि शायद ‘भाईजान’ अबकी बार शाहरुख या आमिर की तरह अपने प्रशंसकों को कलेजा चीर करके दिखा दें और कह दें कि हां, हमें तुमसे मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत है! बउआ मुरुगादॉस से तो ये हो नहीं पाया। उससे पहले भी तमाम दिग्गज हिम्मत करके हार चुके हैं, खुद सलमान खान ही अब सलमान खान को बता सकते हैं कि आखिर वह चीज क्या रहे हैं। कभी कभार तो वह ‘तेरे नाम’ या ‘हम दिल दे चुके सनम’ देखते ही होंगे, नहीं?

Sikandar Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Salman Khan Rashmika Mandanna A R Murugadoss Sathyaraj Anjini
ए आर मुरुगादॉस से नहीं हो पाया

 

 

 

ए आर मुरुगादॉस की धुप्पल लगी थी आमिर खान की फिल्म ‘गजनी’ में, ये बात भी अब कुछ कुछ ठीक लगने लगी है। उसके बाद उन्होंने ‘हॉलीडे’बनाई, ‘अकीरा’ बनाई और अब ये ‘सिकंदर’। रिंग मास्टर हल्का पड़ जाए तो सर्कस के अदने से कलाकार भी खुद को तीसमार खां समझने लगते हैं। फिल्म ‘सिकंदर’ में इसे होते देख सकते हैं। मुरुगादॉस ने दर्जनों कलाकार जुटाए हैं, लेकिन जमाकर अदाकारी एक से भी नहीं करा सके हैं। हर कलाकार ओवरएक्टिंग की दुकान बना हुआ है। रश्मिका मंदाना के भाव देखकर यूं लगता है कि जैसे कह रही हों, मुझे एक्टिंग करने की जरूरत ही नहीं। मेरा तो बस नाम ही काफी है, फिल्म हिट करा देने के लिए। ‘एनिमल’ और ‘छावा’ ने जो नोट छापे हैं, उसमें ऐसा गुमान किसी को भी हो सकता है। लेकिन, दाढ़ी से सनी देओल की उमर भले छुप सकती हो, दूसरे सितारों को ऐसा गुमान नहीं करना चाहिए। गीत-संगीत फिल्म का माशा अल्ला है। नए गीतकार और संगीतकारों को साजिद नाडियाडवाला जैसे निर्माता ट्राई नहीं करते। इसका फायदा उठाकर म्यूजिक उस्ताद प्रीतम और समीर अनजान ने जो म्यूजिक फिल्म ‘सिकंदर’ का बनाया है, वह अगली ईद तक भी कोई याद रख पाया तो सुभान अल्लाह! ईद आप सबको बहुत बहुत मुबारक हो!

 

 

 

Courtsy amarujala.

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